काली पट्टी बांधकर कर रहे हैं कामकाज

Black bands are doing the workings
उज्जैन। प्रदेश के शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालयों, होम्योपैथी एवं यूनानी महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों को प्रदेश के ऐलोपैथी महाविद्यालयों के चिकित्सा शिक्षकों से लगभग आधा वेतन प्राप्त हो रहा है। ऐलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों को वर्ष 2013 में पुनरीक्षित वेतनमान प्रदान किया जाने लगा। आयुर्वेद एवं ऐलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों को वर्ष 2013 में एक साथ पुनरीक्षित वेतनमान प्रदान किए जाने की कार्रवाई की जा रही थी, परंतु केवल ऐलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों को पुनरीक्षित वेतनमान मिला। आयुष महाविद्यालयों के चिकित्सा शिक्षकों को 5 वर्षों से ऐलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों से लगभग आधा ही वेतनमान मिल रहा है।
इस विसंगति के विरोध में उज्जैन के शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों द्वारा 6 अगस्त से काली पट्टी बांधकर कामकाम किया जा रहा है। शीघ्र ही अन्य चिकित्सा शिक्षक भी विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर कामकाज करेंगे।
एक तरफ भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा दूसरी तरफ आयुष शिक्षकों को मिल रहा वेतन ऐलोपैथी से आधा। भारतीय आयुर्वेद के प्रति शासन की यह घोर उपेक्षा है एवं प्राकृतिक न्याय के भी विपरीत है। शासकीय विज्ञान, कला, वाणिज्य आदि महाविद्यालयों में पदस्थ शिक्षक एवं यहां तक लाइब्रेरियन एवं क्रीड़ा शिक्षक भी आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षकों से भी लगभग दोगुना वेतन प्राप्त कर रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षक नियुक्ति में लेकर उच्चतम पद पर 15,600 मूल वेतन पर ही कार्य कर रहे हैं, जबकि ऐलोपैथी चिकित्सा शिक्षक एवं अन्य शासकीय महाविद्यालय के शिक्षक, लाइब्रेरियन एवं क्रीड़ा अधिकारियों को समयमान वेतनमान के अनुसार 8 वर्ष की सेवा के पश्चात 37,400-67,000 मूल वेतन प्राप्त होने लगता है। वर्तमान में जिस प्रकार आयुर्वेद और योग की उपयोगिता बढ़ती जा रही है उसकी उन्नति के लिए आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षकों को ऐलोपैथी शिक्षकों के समान सम्मानजनक वेतनमान प्रदान किया जाना चाहिए। आयुर्वेदिक होम्योपैथी एवं यूनानी चिकित्सा शिक्षक प्रदेश के 10 महाविद्यालयों में पदस्थ हैं। इनकी संख्या लगभग 250 है। इन्हें समान पुनरीक्षित वेतनमान प्रदान करने पर सालाना शासन पर केवल 8 करोड़ का भार आएगा।