भाई का भाई से प्रेम हो संपत्ति से नहीं

Have a feeling of gratitude towards grace, do not grieve to God
श्रीराम कथा के सातवें दिन भरत चरित्र का वर्णन-भावनात्मक गीतों पर भक्त हुए भावविभोर
उज्जैन। भाई का प्रेम भाई से होना चाहिए संपत्ति से नहीं। जिस तरह भरत जी का प्रेम राम जी से रहा, ऐसा प्रेम हमारा रामजी से हो तो प्रकृति भी हमारे अनुकूल हो जाती है यदि संसार से प्रेम हुआ तो प्रकृति भी प्रतिकूल हो जाएगी। राम-भरत मिलन प्रसंग हमें यही सिखाता है कि अधिकार मिलने पर कर्तव्यों को न भूलें जिस तरह भरतजी ने राम को नहीं छोड़ा। जीवन में परिवार के प्रति समर्पण का भाव रखें जहां समर्पण है वहां प्रेम है।
सामाजिक न्याय परिसर में चल रही श्रीराम कथा में यह बात भरत चरित्र का वर्णन करते हुए पं. सुलभ शांतु महाराज ने कही। आपने कहा हमारा जीवन क्वांटिटी ऑफ लाइफ ना हो, क्वालिटी ऑफ लाइफ हो। कितना जिया यह महत्वपूर्ण नहीं है कैसे जिया यह विशेष बात है। गुरूजी ने उदाहरण देते हुए कहा कि आमतौर पर जन्मदिवस या किसी प्रसंग पर लोग सौ साल जियो शतायु हो हजारों साल जियो ऐसी कामना व बधाइयां प्रेषित करते हैं हम ले भी लेते हैं लेकिन यह विचार नहीं होता कि इतने साल जी कर करेंगे क्या। कितना जिया यह महत्वपूर्ण नहीं कैसे जिया यह विशेष हैं हम इसी पर केंद्रित रहें। महाराजश्री ने कथा के मध्य में व्यासपीठ से ‘जब जीवन खत्म हुआ तो जीने का ढंग आया’ गीत गाया तो श्रद्धालु भक्ति भाव से विभोर हो गए। कथा समापन पर पूर्व मंत्री शिवनारायण जागीरदार, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र वशिष्ठ, मंडी समिति अध्यक्ष बहादुरसिंह बोरमुंडला, वरिष्ठ पत्रकार गोपाल वाजपेई, बाणेश्वरी ग्रुप इंदौर के बॉबी शुक्ला, पूर्व डिप्टी कलेक्टर जेसी बोरासी, राम भागवत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भरत पोरवाल, मंगलनाथ मंदिर पुजारी दिप्तेश गुरु, जोन अध्यक्ष विनीता शर्मा, भाजपा महामंत्री विवेक जोशी, वीरेंद्र कावड़िया, पार्षद संजय कोरट, अध्यक्ष मोहन जायसवाल, गोपाल बागरवाल सहित अन्य लोगों ने आरती की। श्री गुजराती रामी माली समाज, न्यू खंडेलवाल महिला मंडल, अग्रवाल नवयुवक परिषद व अन्य संस्थाओं ने गुरुजी का अभिनंदन किया। बुधवार को कथा के मुख्य यजमान रामअवतार शर्मा रमेशचंद्र चौधरी रहे। बाबा बाल हनुमान भक्त मंडल के बंटी भदौरिया व राहुल कटारिया एवं खाटू श्याम पारमार्थिक ट्रस्ट के अजेश अग्रवाल के अनुसार गुरुवार को कथा में शबरी चरित्र व अन्य प्रसंगों का वर्णन होगा शुक्रवार को कथा का विश्राम दिवस है।

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