सिंहस्थ और क्षिप्रा पर संकट के बादल अवधेशपुरी महाराज ने प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री को लिखा पत्र-अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग

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सिंहस्थ और क्षिप्रा पर संकट के बादल
अवधेशपुरी महाराज ने प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री को लिखा पत्र-अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग
उज्जैन। सिंहस्थ क्षेत्र में तथा क्षिप्रा किनारे हो रहे अतिक्रमण को लेकर परमहंस अवधेशपुरी महाराज प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर धार्मिक नगरी में अतिक्रमण के रूप में पैर पसार रहे इन संकट के बादलों को हटाए जाने की मांग की है।
अवधेशपुरी महाराज ने पत्र में लिखा कि जिस क्षिप्रा में अमृत की बूंदे गिरी यहां न तो वह मोक्षदायिनी सुरक्षित है और न ही साधु संतों के लिए सिंहस्थ में साधना के लिए सिंहस्थ क्षेत्र सुरक्षित है। संवैधानिक दृष्टि से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना करते हुए नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए क्षिप्रा से सटकर तथा सिंहस्थ क्षेत्रों में अधिकारियों एवं भूमाफियाओं की मिलीभगत से धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। सारे जिम्मेदार अपने-अपने स्वार्थों में अंधे होकर धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। आश्चर्य की बात है कि जब क्षिप्रा के किनारे ही सुरक्षित नहीं है तो प्रशासन क्षिप्रा के किनारे लाखों पौधे लगाने का दावा किस आधार पर कर रहा है। वास्तविकता यह है कि कानूनन रूप से नदी किनारों की 200 मीटर की भूमि जिसे पौधारोपण के लिए छोड़ना चाहिये उस पर भी कॉलोनियां खड़ी हो चुकी है। अवधेशपुरी महाराज ने मांग की कि हिंदू धर्म के सबसे बड़े समागम सिंहस्थ एवं क्षिप्रा के अस्तित्व की रक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारी एवं कॉलोनाईजरों पर कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से सिंहस्थ एवं क्षिप्रा के किनारों पर हुए अतिक्रमण को हटाना चाहिये तभी हम सिंहस्थ की सनातन एवं समृध्द परंपरा की रक्षा कर सकते हैं।