“पंचांग प्रशिक्षण कार्यशाला” का सम्पूर्ति सत्र आयोजित

"पंचांग प्रशिक्षण कार्यशाला" का सम्पूर्ति सत्र आयोजित

आज दि० 13 अक्टूबर को ज्योतिष विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में काशी के प्रख्यात ज्योतिर्विद एंव धर्मशास्त्री स्वर्गीय पं.हीरालाल मिश्र की स्मृति में आज 18 सितम्बर से चल रही “पंचांग प्रशिक्षण कार्यशाला” का सम्पूर्ति सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत,एवं हीरालाल मिश्र के व्यक्तित्व और कृतित्व के विविध पक्षों का उल्लेख करते हुए ज्योतिष विभाग के डॉ शत्रुघ्न त्रिपाठी ने कहा कि मिश्र जी 21वीं शताब्दी के उन बिरल व्यक्तित्वों में से एक थे जिन्होने ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र दोनेा क्षेत्रों में अपनी गहरी छाप छोडी है। ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाण्डेय ने कहा कि चाहे ज्योतिष का क्षेत्र हो, कर्मकांड का विषय हो, वास्तु विज्ञान,भवन निर्माण,वर्षा विज्ञान,वनस्पति विज्ञान, या शकुन शास्त्र की चर्चा हो, लोक जीवन के अनेक बहुविध उपयोगी विधाओं में, जनप्रिय लोक साहित्य में एवं प्रायोगिक ज्ञान में पंडित श्री हीरालाल मिश्र अत्यंत निष्णात थे। ज्योतिष के तीनो स्कन्ध मे मिश्र जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डॉ सुभाष पाण्डेय जी ने कहा कि मिश्र जी जैसा दैवज्ञ यदा कदा ही इस धरा धाम पर अवतरित होते है । गुरु जी काशी के सिद्धस्त ज्योतिषी थे। ज्योतिष शास्त्र के अंगों निष्णात विद्वान होने के साथ साथ ज्योतिष शास्त्र से हटकर, दैनिक जीवनोपयोगी अनेक विद्याओं के भी विद्वान थे। गुरु जी का पढ़ाने का आत्मीय अंदाज और सौम्य मुस्कान सभी छात्रों को प्रभावित करता था। काशी को सपनों की भूमि मानने वाले मिश्र गुरु जी ज्योतिष विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अपने अध्यापन से छात्रों मे इतने लोकप्रिय हो जाते थे कि शायद ही कोई अन्य अध्यापक मिश्र जी जैसी लोकप्रियता की इस कतार को पार कर पाया हो। वहीं शब्दकर्मियों की शब्द क्रीड़ा के माध्यम से की गई अभिव्यक्ति एक कौतूहल उत्पन्न करते हुए सहज ही मन को बेध देती है। ऐसा ही कुछ गुरु जी की से पढ़कर अहसास होता था। किसी भी व्यक्ति की सोच और उसकी अभिव्यक्ति उसके अंतर्मन में व्याप्त शब्दों का योग होती है। वह जो कुछ जैसा सोचता है, वही उसकी निजता बन जाती है। निष्कर्ष रूप में कहा जाए तो मिश्र गुरु जी ज्योतिष शास्त्र की सरसता, सजग संवेदना और सूक्ष्म विवेचना की प्रवहमान त्रिवेणी थे।
प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री जी ने हीरा लाल मिश्र के व्यक्तित्व,व्यवहार समाजसेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षकों को एक गुरू रूप में अपने विश्वविद्यालय के छात्रों को एक अच्छी शिक्षा देकर उन्हें काबिल बनाना उनका परम कर्तव्य होता है। इस विश्वविद्यालय के शिक्षक भी मिश्र जी के नक्शे कदम पर चलकर एक कुशल शिक्षित समाज निर्माण की कड़ी में अपनी भागीदारी निभाएगें। प्रो. चन्द्रमौली उपाध्याय जी ने कहा कि ज्योतिष विभाग मे बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुके गुरु जी अध्यापन की जिजीविषा से सक्रिय रूप से जुड़े रहे, जिसे बनाए रखने के लिए अभी तक मिश्र जी सतत, जीवंत व सृजनशील रहे। मिश्र जी की अभिरुचि अनुसंधात्मक के साथ-साथ सदैव वैज्ञानिक व खोजपूर्ण रही है। इसके अलावा प्रोफेसर रामजीवन मिश्र, डॉ सुशील गुप्ता आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार पाण्डेय, संचालन डा. सुनील त्रिपाठी,धन्यवाद ज्ञापन आचार्य कृपाशंकर जी ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रोफेसर धनंजय पाण्डेय, डा. राहुल मिश्र, डा. आकाश द्विवेदी,ज्योतिषाचार्य पं गणेश मिश्र, आशुतोष तिवारी, रंजीत दुबे आदि उपस्थित रहे।