विक्रम विश्वविद्यालय की मास कम्युनिकेशन की डिग्री पर खड़ा हुआ संकट नियमों को ताक पर रखकर पाठ्यक्रम स्थानांतरित

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उज्जैन। विश्वविद्यालयों की समन्वय समिति द्वारा लिए गए निर्णय के खिलाफ विक्रम विश्वविद्यालय ने आदेश जारी करके सतत शिक्षा अध्ययनशाला में संचालित स्नातकोत्तर जनसंचार पाठ्यक्रम को हिन्दी अध्ययनशाला में संचालित किए जाने का फैसला ले लिया।
विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा विश्वविद्यालय अधिनियम और कुलाधिपति की समन्वय समिति के निर्णयों की जो अवहेलना की जा रही है उससे जुड़ा मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय की विद्या परिषद और कार्यपरिषद द्वारा निर्णय लिया जाकर समन्वय समिति में पारित करवाए जाने के बाद उसे किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जा सकता। किन्तु सतत शिक्षा अध्ययनशाला में संचालित स्नातकोत्तर जनसंचार पाठ्यक्रम में एक पक्षीय निर्णय लेकर समस्त कानून और नियमों को ताक पर रख दिया गया। इसे संचालित करने के लिए कुलाधिपति की समन्वय समिति की 50वीं बैठक द्वारा स्वीकृत अध्यादेश क्र. 40 के अंतर्गत 1994 में प्रभावशील किया गया है। यह अधिनियम और अध्यादेश का सीधा उल्लंघन है।
विश्वविद्यालयों की समन्वय समिति में निर्धारित मापदंडों के अनुसार विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में सतत शिक्षा अध्ययनशाला के अंतर्गत पहले जनसंचार पाठ्यक्रम को संचालित करने के आदेश दिए। इसी अनुक्रम में अध्ययनशाला के अध्यादेश और पाठ्यक्रम की संरचना एवं संकाय को अंगीकृत किया गया। साथ ही इसकी शैक्षणिक प्रक्रिया के अनुरूप ही डिग्री को मान्य किया जाकर विद्यार्थियों को प्रदान की जा रही है। किन्तु इन सभी मान्य वैधानिकता को अमान्य करते हुए विक्रम विश्वविद्यालय ने स्वयंभू वैधानिक निर्णय लेकर डिग्री पर ही प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया।
विक्रम विश्वविद्यालय के अंतर्गत सतत शिक्षा अध्ययनशाला, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित गतिविधियों को संचालित करने के लिए स्थापित ऐसा शैक्षणिक विभाग है, जिसे वर्ष 1999 में यूनेस्को का सर्वश्रेष्ठ अवार्ड दिया गया। साथ ही राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (हृ्र्रष्ट) नैक विश्वविद्यालय की मूल्यांकन रिपोर्ट में भी अध्ययनशाला को सर्वश्रेष्ठ मूल्यांकित किया गया है। साथ ही यहाँ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालन के अलावा सामुदायिक, सतत शिक्षा एवं विस्तार कार्यक्रमों के साथ-साथ शोध कार्य भी यहाँ निरन्तर किए जा रहे हैं।