कृषि को उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए जिला स्तरीया सेमीनार

District level seminars to develop agriculture as industry
उज्जैन। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की सहकारी शिक्षा क्षैत्रीय परियोजना, उज्जैन (म.प्र.) द्वारा कृषि को उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन उज्जैन के स्थानीय होटल में किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री ओ.पी. गुप्ता, उपायुक्त सहकारिता, उज्जैन। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री आर.के.दुबे, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि तथा विषय विशेषज्ञ डॉ. जी.जी. गोस्वामी, मोबाईल यूनिट प्रभारी पशु चिकित्सालय, उज्जैन, श्री सुभाष श्रीवास्तव, वरिष्ठ उद्यानकी विकास अधिकारी उद्यानकी एवं श्री नवीन कुमार गुप्त सहायक  उर्वरक प्रयोगशाला अधिकारी, उज्जैन थे। प्रारंभ में अतिथियों द्वारा गांधी के चित्र पर सूत की माला एवं पुष्प अर्पित कर किये गये। चंद्रशेखर बैरागी प्रभारी परियोजना अधिकारी द्वारा अतिथि परिचय तथा स्वागत भाषण दिया गया एवं परियोजना द्वारा चलायी जा रही गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री ओ.पी. गुप्ता, उपायुक्त सहकारिता, उज्जेन ने उपस्थित प्रतिभागियों को कहा कि वर्तमान में कृषि भूमि दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है एवं जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि भूमि का बंटवारा बढ़ रहा है। जिससे लघु एवं सीमांत कृषकों की कृषि संख्या बढ़ती जा रही है। इसलिए आज समय की मांग है कि सभी मिलकर सामूहिक खेती करें (सहकारी) जिससे कृषकों की कृषि लागतइ में कमी आएगी एवं उन्हें बीज, उर्वरक, कीटनाशक तथा कृषि मार्गदर्शन साथ ही विपणन (मार्केटिंग) की सुव्यवस्थित प्रणाली सहकारिता के माध्यम से उपलब्ध होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री आर.के.दुबे, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं प्रभारी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला उज्जैन में कहा  कि अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम आप अपनी खेती की मिट्टी का परीक्षण करवाकर उसके अनुरूप फसलों का चयन करें, जिससे अच्छा उत्पादन एवं लाभ प्राप्त होगा। रबी फसल के बाद आप अपने खेतों की नरवाई (खापे) न जलाये। क्योंकि नरवाई जलने के कारण खेत में उपलब्ध जीवांश जल जाते एवं प्रदूषण भी फैसला है। इस कारण अपने खेत का उपजाऊपन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। साथ ही रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का अपने खेतों में अत्यधिक उपयोग करने के फलस्वरूप खेत शने:-शने: क्षारी होते जा रहे है और अंत में वह बंजर भूमि के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं।
कार्यक्रम के विषय डॉ. जी.जी. गोस्वामी, मोबाईल यूनिट प्रभारी पशु चिकित्सालय, उज्जैन ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में उपस्थित संस्था के सदस्यों को बताया कि वर्तमान में खेती को लाभ का धंधा बनाना है तो पशुपालन आवश्यक है। क्योंकि पशुपालन करने से अपने घर का खर्च तो निकलेगा ही उसके गोबर से आपकी खेती भी उपजाऊ होगी। पशुपालन के लिए उचित नस्ल का चयन करना अतिआवश्यक है। गाय एवं भैंसों की भारतीय नस्लों का ही चयन करना चाहिए जैसे गौ पालन में मालवी, गीर, साईवाल, थापरकर आदि तथा भैंसों में मालवी, मुर्रा, बनी, जाफरी आदि नस्ल होना चाहिए। क्योंकि यह भारतीय जलवायु के अनुकूल नस्लें हैं। पशुपालन में सबसे महत्वपूर्ण पशुओं को उचित आहार, रहने का स्थान, समय- समय पर टीकाकरण, सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति एवं उचित देखभाल करने के तरीके बताये। साथ ही उन्होंने शासन द्वारा चलायी जा रही योजनाओं की जानकारी दी। जिसमें वत्स पालन, नंदीशाला योजना, गोपाल पुरस्कार, आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
श्रीनवीन कुमार गुप्ता सहायक रसायन एवं उर्वरक प्रयोगशाला अधिकारी, उज्जैन ने संस्था सदसयों एवं कृषकों को बताया कि आप खेतों में उर्वरकों का अत्यधिक मात्रा में कर रहे हैं जिसके कारण कई प्रकार के वाईरस एवं कीट उत्पन्न हो रहे हैं। जिसके नियंत्रण के लिए कीटनाशक भी प्रभावहीन हो रहे हैं। आपको अपनी फसललों के अनुरूप उचित मात्रा एवं वैज्ञानिक सलाह से उत्तम किस्म के उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। जिसके परिणामस्वरूप आपकी फसलों का उत्पादन एवं गुणवत्ता अच्छी होगी साथ ही खेतों का नुकसान भी नहीं होगा। उन्होंने बातया कि जैसे आप पूर्व में अतंतवर्तीय फसलें लेते थे जैसे-गेहूं, ज्वार, चना आदि आज चेने के खेतों में चना उतरने की शिकायत बहुतायात में हो रही है। उसका कारण ज्वार नहीं बोना है। पहले ज्वार बोते थे तो यह समस्या नहीं होती थी क्योकि ज्वार की जड़ में एक खास प्रकार का रसायन होता है जिसकेे परिणाम स्वरूप यह बीमारी नहीं आती थी। चुकी आज ज्वार बोते ही नहीं है। अत: उसमें विभिन्न प्रकार की बीमारियां आ रही है।
श्री गुप्ता जी ने घर पर ही नकली उर्वरकों की पहचान कैसे की जाए इसके तरीके बतलाये। साथ ही जानकारी दी की उर्वरक एवं बीज परीक्षण के लिए शासन द्वारा उज्जैन में प्रयोगशाला स्थापित कर दी गई है।
श्री सुभाष श्रीवास्तव, वरिष्ठ उद्यानिकी विकास अधिकारी ने बताया कि कृषकों को अपनी आय बढ़ाने के लिए परम्परागत खेती के साथ उद्यान की फसल भी अपनानी होगी तभी कृषि उद्योग का दर्जा प्राप्त होगा। गाय के गोबर से २४ घंटे में कम्पोस्ट खाद बनाने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि सुबह देशी गाय का फ्रेश गोबल लेकर उसे गोबर गैस प्लांट में डालकर जो उसका अवशिष्ट (सेलरी) निकलती है वही कम्पोस्ट खाद होता है। कम समय में जैविक खाद इस प्रकार तैयार हो जाता है। उन्होंने बताया कि एक बीघा जमीन को चार हिस्सों में बांट कर मिश्रित खेती की जाए जैसे आलू, मटर, पपीता, मूली, धनिया, पालक तथा हरी मिर्ची  आदि सब सब्जियों को एकसाथ कैसे ले सकते हैं, के बारे में बतलाया। जिससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त एवं उसकी मार्केटिंग भी आसानी से हो जाती है। उन्होंने सब्जी के रौप तैयार करने की विधियां जैसे पॉली हाऊस, ड्रीप एरिकेशन, ग्रीन नेट के नीचे रोप तैयार करने की विधियों बतलायी।
कार्यक्रम में उज्जैन कृषि सेवा सहकारी संस्था के अध्यक्ष श्री श्रीराम सांखला ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के द्वारा समय-समय पर कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण आयोजित किये जाते हैं। जिससे हम कृषकों को नवीन किस्म की फसल तथा शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त होती है आगे भी ऐसे ही ज्ञानवर्धक सफल आयोजन होते रहे यही हमारी मंशा है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए सहकारी शिक्षा प्रेरक प्रेमसिंह झाला ने बताया कि यह कार्यक्रम कृषि उद्योग कैसे बनाया जाए विषय पर था। इसमें हमने खेत तैयार करना, उर्वरक की महत्ता एवं प्रमाणित बीज, उद्यानकी फसलों एवं योजनाओं की जानकारी साथ ही पशुपालन का महत्व बतलाने के लिए पशुपालन विभाग की सम्मिलित किया जिससे हमारे कृषकों कृषि को उद्योग के रूप में अपनाा सकें।
कार्यक्रम के अंत में जगदीश नारायणसिंह सरकारी शिक्षा प्रेरक ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों को इस आयोजन को सफल बनाने पर आभार प्रकट किया।

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