दुष्टों के प्रेम में भी विश्वास नहीं करना चाहिये

Do not believe in the love of the wicked

श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ में हुआ भगवान कृष्ण जन्मोत्सव-बैंड बाजों से लाए कान्हा को कथा स्थल

उज्जैन। जब-जब पाप बढ़ते हैं, तब-तब पापों को हरने के लिए भगवान का जन्म होता है, भगवान कृष्ण भी तब पैदा हुए जब असुर बलवान होने लगे। देवकी के गर्भ से आठवी संतान के रूप में भगवान जन्में। इसके पहले सात संतानों की कंस ने हत्या कर दी। कंस देवकी का भाई था लेकिन दुष्ट था, और दुष्टों के प्रेम में भी विश्वास नहीं करना चाहिये, कब खुश हो जाये, कब रूष्ट पता नहीं।
यह बात चिंकेश्वरी दीदी पिता नवीन पंड्या ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कही। श्रीमद् भागवत कथा सेवा समिति द्वारा लक्कड़गंज स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर धर्मशाला प्रांगण में आयोजित भागवत कथा में बुधवार को अजामिलोपाख्यान, प्रहलाद चरित्र, गजेन्द्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन प्राकट्य, राम जन्म, कृष्ण जन्म तथा नंदोत्सव की कथा सुनाई। कृष्ण जन्मोत्सव पर भक्त जमकर नाचे और सभी ने पालना झुलाकर कान्हा को झुलाया। इससे पहले भगवान कृष्ण को सिर पर धारण कर बैंड बाजे से वासुदेव भक्तों संग कथा स्थल तक लाये। प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक होने वाली इस कथा में आज गुरूवार को भगवान कृष्ण की बाल लीला के दर्शन होंगे। कथा भाटी राजपूत समाज, मां ज्ञानेश्वरी ग्रुप, समर्पण सेवा समिति, हनुमान भक्त मंडल, मां अन्नपूर्णा हलवाई संघ, हमारा भक्त परिवार के सहयोग से आयोजित की जा रही है।

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