सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर समिति से जवाब माँगा

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उज्जैन | विश्व प्रसिद्द महाकाल मंदिर के कार्यो और एक्ट विरुद्ध पण्डे  पुजारियों  को दान में से हिस्से दाने वाले नियम को लेकर लगायी गयी याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने  इंदौर  डबल बेंच के फेसले को रोकते हुए चार हफ्ते में महाकाल मंदिर समिति से जवाब माँगा है हालाकि नोटिस अब तक मंदिर समिति के पास पंहुच नहीं है
 महाकाल मंदिर के पुजारी परिवार की बहु सारिका चोबे की और से  2013 में एक पिटीशन हाय कोर्ट में दायर की गयी जिसमे मंदीर  में अलग अलग दान पेटियों में से दान में पुजारी और पुरोहित के क्रमश 75 प्रतिशत और 35 प्रतिशत हिस्से को देने के खिलाफ थी . इस को लेकर हाय कोर्ट ने मंदिर समिति के एक्ट का हवाला दिया और पूछा की मंदिर समिति की बात को लेकर पुजारी और पुरोहित को हिस्सा दे रही है वन्ही सारिका चोबे ने बताया की एक्ट में कंही भी नहीं लिखा गया है वन्ही सभी पण्डे पुजारी किसी की भी नियुक्ति वेध नहीं है . इस पर निरनय देते हुए मंदिर समिति को हाय कोर्ट ने आदेश किया था मंदिर एक्ट के तहत ही काम हो . इस पर से मंदिर के पुजारी ने डबल बेंच में रीड लगा दी जिस पर से कोर्ट ने सिंगल बेंच के फेसले को बदलकर पूर्व इस्थ्ती में कर दिया था . इसके बाद सारिका  सुप्रीम कोर्ट पंहुच गयी और अब सुप्रीम कोर्ट ने और डबल बेंच के फेसले पर रोक लगाते हुए  महाकाल मंदिर समिति से चार हफ्ते में जवाब माँगा है . सन १९८२ में बना था एक्ट . हालाकि मंदिर में अधकतर पुजारी और पुरोहित  की नियुक्ति अवेध ही है
*यह है प्रमुख बिंदु*
1. दानपेटी से 35 फीसदी राशि पुजारी को देने पर आपत्ति।
2. अभिषेक पूजन की रसीद में से 75 फीसदी राशि पुजारी-पुरोहित को देने पर आपत्ति।
3. मंदिर एक्ट में पुजारी प्रतिनिधि नहीं होने का प्रावधान। बावजूद  पुजारी पुरोहित  रखे।
4. मंदिर एक्ट के विपरित गैर योजना में राशि खर्च किया जाना।
महाकाल मंदिर में कुल 22 पुरोहित और 16 पुजारी है जिसमे हर साल पण्डे पुजारी को उनका हिस्सा दिया जात है सारिका का कहना है की पण्डे पुजारियों को मंदिर का बिजनेस पार्टनर बना रखा ही जो भी कमाई हो गी उसका आधा आधा हिस्सा बाट  लेंगे . सभी पुरोहित और पंडित को अलग अलग दान पेटियों  में से हिस्सा मिलता  है . वन्ही मंदिर प्रशासक ने कहा की अभी तक कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है  शीर्ष कोर्ट का निर्णय माना जायेगा

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