शिवराज ‘सर’ ने ली क्लास, राधिका घबराई

Shivraj 'Sir' asked Lee class, Radhika's tantrums - Mama is good or bad?

भोपाल। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुनिवार को सरकार के मुखिया नहीं बल्कि ‘सर’ की भूमिका में नजर आए। जैसे रोज पढ़ाने वाले कई शिक्षक समय से कुछ मिनट पहले ही क्लास में पहुंच जाते हैं, ठीके वैसे ही सीएम शिवराज मैनिट के सरकारी स्कूल में तय समय से कुछ मिनट पहले पहुंच गए। मौका था मिल बांचे कार्यक्रम का।

सीएम शिवराज विशेष तौर पर सजाई गई क्लास में पहुंचे और तीन कहानियों के जरिए उन्होंने बच्चों को सत्य का पाठ पढ़ाया। उन्होंने बच्चों से कहा कि जैसा वे सोचेंगे वैसे ही बनेंगे। बुद्धि सब में बराबर होती है। शिवराज ने फिर पूछा कि उन्होंने जो कहानी सुनाई है, उसे जीवन में कौन उतारेगा? इस पर सभी बच्चों ने हाथ खड़े कर दिए।

फिर आई किताबी ज्ञान की बारी। शिवराज ने चौथी कक्षा की राधिका को बुलाकर ‘समय बड़ा अनमोल’ कहानी पढ़ने को कहा, तो राधिका घबरा गई। सीएम ने उसे दुलारते हुए कहा – बेटा घबराओ मत। पूरे आत्मविश्वास के साथ पढ़ो। इसके बाद राधिका ने पूरी कहानी पढ़ी। कहानी के बाद बच्चों से बात करते हुए सीएम ने पूछ ही लिया – मामा अच्छे हैं या बुरे? बच्चों ने अच्छा कहा तो शिवराज ने पूछा फिर क्यों घबरा रहे हो?

आई गणित की बारी

पहले हुए जोड़-घटाव के सरल सवालों को तो बच्चों ने हल कर दिए। पर बाद में शिवराज सर ने एक कठिन सवाल सामने रखा। बच्चों को 373 का गुणा 425 से करने था। पहले एक छात्रा बोर्ड पर सवाल हल करने आई, लेकिन नहीं कर पाई। फिर आठवीं कक्षा के अक्षय को बुलाया गया। वे भी सवाल सही तरीके से हल नहीं कर पाए। शिवराज ने बच्चों का हौसला बढ़ाया और ताली बजवाई। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बच्चे भले ही एक सवाल हल नहीं कर पाए हों लेकिन वे गणित में ज्यादा कमजोर नहीं हैं।

हर बरसात में पौधारोपण का कार्यक्रम हो

शिवराज एक-एक कर सभी विषयों को छू रहे थे। गणित के बाद पर्यावरण से प्रेम करने की सीख उन्होंने दी। उन्होंने कहा कि हर बरसात में एक बार स्कूलों में पौधारोपण का कार्यक्रम होना चाहिए। हम जितनी ऑक्सीजन लेते हैं, कम से उतने पेड़ तो लगाने ही चाहिए। इसके बाद शिवराज ने सभी बच्चों से पेड़ लगाने का संकल्प दिलवाया।

सूर्यनमस्कार की सीख दी

सीएम ने बच्चों को सुबह जल्दी उठकर सूर्य नमस्कार करने का पाठ भी पढ़ाया। इससे पहले उन्होंने बच्चों से सुबह उठने और सोने का समय पूछा। शिवराज ने पूछा कि रात को 12 बजे कौन सोता है? तो कुछ बच्चों ने हाथ खड़े कर दिए। फिर शिवराज ने पूछा कि 12 बजे तक क्या करते हो, तो बच्चे बोले टीवी देखते हैं। इस पर सभी लोग हंस पड़े। फिर मुख्यमंत्री ने पूछा, सूर्य नमस्कार करते हो? बच्चों ने जवाब दिया, नहीं।

युधिष्ठिर की कहानी से सिखाया सत्य का पाठ

युधिष्ठिर सहित उनके साथियों को गुस्र्जी ने सिखाया, हमेशा सत्य बोलो। गुस्र्जी चार दिन तक युधिष्ठिर से पूछते रहे कि पाठ याद हो गया? युधिष्ठिर मना करते रहे और रोज डांट खाते रहे। पांचवे दिन फिर गुस्र्जी ने पूछा कि पाठ याद हुआ? तो युधिष्ठिर ने हां में जवाब दिया। गुस्र्जी ने पूछा कैसे? तो युधिष्ठिर ने जवाब दिया कि चार दिनों से जानते हुए भी मैं झूठ बोलना बंद नहीं कर पाया, लेकिन कल मैंने झूठ नहीं बोला, इसलिए आज आत्मविश्वास से कह रहा हूं कि हमेशा सत्य बोलो। यह कहानी सुनाकर शिवराज ने बच्चों से कहा कि जो भी सीखो, उसे अपने जीवन में उतारो।

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