श्रावण सोमवार पर विशेष: पापों के दावानल से दग्ध होने वालों को शिव नामामृत बिना शान्ति नहीं

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श्रावण सोमवार पर विशेष: पापों के दावानल से दग्ध होने वालों को शिव नामामृत बिना शान्ति नहीं

वाराणसी। काशी शिव की नगरी है लेकिन पवित्र श्रावण मास में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुराधिपति को मत्था टेकने की खातिर जुटते हैं। इनकी जुबां पर सिर्फ शिव नाम होता है। पुराणों में कहा गया है कि जो शिवनामरूपी नौका पर आरूढ़ हो संसार रूपी समुद्र को पार करते हैं, उनके जन्म मरणरूप संसार के मूलभूत पातकरूपी पादपों का शिवनामरूपी कुठार से निश्चय ही नाश हो जाता है। जो पापों के दावानल से पीड़ित हैं, उन्हे शिवनामरूपी अमृत का पान करना चाहिये। पापों के दावानल से दग्ध होने वाले लोगों को उस शिव नामामृत के बिना शान्तिपाठ नही मिल सकती। जो शिवनामरूपी सुधा की वृष्टिजनित धारा में गोते लगा रहे हैं, वे संसार रूपी दावानल के बीच मे खड़े होने पर भी कदापि शोक के भागी नही होते।

मिलती है समस्त पापों से मुक्ति

बीएचयू ज्योतिष विभाग के पं. गणेश प्रसाद मिश्र का कहना है कि जिन महात्माओं के मन मे शिवनाम के प्रति बड़ी भारी भक्ति है ऐसे लोगों की सहसा और सर्वथा मुक्ति होती है। जिसके मन मे भगवान शिव के नाम के प्रति कभी खण्डित न होने वाली असाधारण भक्ति प्रकट हुई है, उसी के लिए मोक्ष सुलभ है। जो अनेक पाप करके भी भगवान शिव के नाम जप में आदर पूर्वक लग गया है, वह समस्त पापों से मुक्त हो ही जाता है। इसमें संशय नहीं है। जैसे वन में दावानल से दग्ध हुए वृक्ष भस्म हो जाते हैं, उसी प्रकार शिवनामरूपी दावानल से दग्ध होकर उस समय तक के सारे पाप भस्म हो जाते हैं। जिसके अंग नित्य भस्म लगाने से पवित्र हो गए हैं तथा जो शिवनामजप का आदर करने लगा है वह घोर संसार- सागर को भी पार कर ही लेता है। संपूर्ण वेदो का अवलोकन करके पूर्ववर्ती महर्षियों ने यही निश्चित किया है कि भगवान शिव के नाम का जप संसार-सागर को पार करने के लिए सर्वोत्तम उपाय है ।अधिक कहने से क्या लाभ शिव नाम के सर्वपापापहारी महात्म्यका एक ही श्लोक में वर्णन शिवपुराण मे किया गया है।

एक नाम में ही पाप हरण की शक्ति

पापानां हरणे शम्भोर्नाम्नि: शक्तिर्हि यावती। शक्नोति पातकं तावत्कर्तुं नापि नर: क्वचित।। अर्थात भगवान शंकर के एक नाम में भी पाप हरण की जितनी शक्ति है उतना पातक मनुष्य कभी कर ही नहीं सकता। प्राचीन काल में महापापी राजा इन्द्रद्युम्न ने शिवनाम के प्रभाव से ही उत्तम सद्गति प्राप्त की थी। इसी तरह कोई ब्रम्हाणी युवती भी जो बहुत पाप कर चुकी थी शिवनाम के प्रभाव से ही उत्तम गति को प्राप्त हुई।