महाकाल की धरती पर होगा बारह ज्योतिर्लिंगों का दिव्य एवं अदभुत संगम 

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उज्जैन । बाबा महाकाल एवं पुण्य सलिला शिप्रा की भूमि उज्ज्यिनी पर जहां प्रत्येक बारह साल में अमृत पर्व कुंभ जैसा अलौकिक एवं आध्यात्मिक आयोजन होता है, वहां इस वर्ष से एक और प्रत्येक बारह वर्ष में बारह ज्योतिर्लिंगों के समागम का दिव्य एवं अदभुत आयोजन शैव महोत्सव 5, 6 एवं 7 जनवरी 2018 को होने जा रहा है। इसके अन्तर्गत समस्त बारह ज्योतिर्लिंगों के प्रतिनिधि, सन्त, साधु, महात्मा एवं विद्वान उपस्थित होंगे तथा आध्यात्मिक एवं सारस्वत मंथन के उपरान्त प्राप्त अमृत हमें प्रदान करेंगे। शैव महोत्सव-2018 के अन्तर्गत शोभायात्रा एवं प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है, जिसके अन्तर्गत सभी बारह ज्योतिर्लिंगों की सुन्दर प्रतिकृतियों को प्रदर्शित किया जायेगा।

क्या है शैव महोत्सव?

      पूरे विश्व में द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की पूजा के पावन स्थल है। सभी शिवभक्तों के लिये ये दिव्य एवं आल्हादित करने वाला अवसर होगा, जब बाबा महाकाल एवं उज्जैन की धरती पर उन्हें सभी ज्योतिर्लिंगों की एकसाथ अनुभूति होगी। शैव महोत्सव साक्षी होगा सभी शैव पूजा के पावन स्थलों के एक स्थान पर संगम का तथा उन सन्तों एवं विद्वानों के दर्शन का, जो कि शैव दर्शनों पर आधारित परिचर्चा उपरान्त उनके निकष से हमें कृतार्थ करेंगे।

शैव महोत्सव के उद्देश्य

      शैव महोत्सव के उद्देश्यों में विश्व स्तर पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के माहात्म्य को प्रसारित करना, विभिन्न शैव दर्शनों के प्रकाश में परिचर्चा एवं प्रदर्शनी का आयोजन करना, हिन्दू धर्म संस्कृति एवं दर्शन पर गहन विचार मंथन एवं चिन्तन कर उन्हें समसामयिक सन्दर्भ में प्रतिपादित करना, हिन्दू धर्म संस्थानों की गरिमा के अनुरूप वेदोक्त पूजा पद्धति की साम्य के साथ निरूपित करना, वेदोक्त एवं पुराणिक सन्दर्भों के अनुरूप आधुनिक प्रबंधन तकनीक एवं संसाधनों का प्रयोग करते हुए पर्यावरण व पारिस्थितिकी के अनुकूल उत्कृष्ट व्यवस्था का निर्माण करना एवं इस हेतु द्वादश ज्योतिर्लिंगों का व्यवस्था प्रबंधन एवं समन्वय करना, सामाजिक लोक उत्तरदायित्व के कार्यों का विस्तार किए जाने पर विचार एवं इसके माध्यम से सामाजिक समरसता के स्थापन का कार्य करना, राष्ट्रोत्थान हेतु द्वादश ज्योतिर्लिंग संस्थानों की प्रतिभागिता एवं समन्वय करना, शैव एवं वैष्णव देवस्थान जो कि आदिकाल से राष्ट्रीय चेतना के केन्द्र रहे हैं के गौरव की पुनर्स्थापना करना, आध्यात्मिक मनोभाव के साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना आदि हैं।

परिचर्चाएं आयोजित होंगी

      शैव महोत्सव के अन्तर्गत्‍ 5, 6 एवं 7 जनवरी को चार स्थलों पर शैव दर्शन आदि पर परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी, जिनके लिये चार पीठें बनाई गई हैं। ये पीठ हैं- सनातन व्यासपीठ, स्वामी सन्तदास उदासीन आश्रम नृसिंह घाट, सनक व्यासपीठ श्री बालमुकुन्द आश्रम झालरिया मठ, श्री सनन्दन व्यासपीठ श्री बालमुकुन्द आश्रम झालरिया मठ और सनत कुमार व्यासपीठ श्री महाकालेश्वर प्रवचन हॉल महाकाल मन्दिर।

शोभायात्रा

      कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर 5 जनवरी को सायं 4 बजे से द्वादश ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृतियों के साथ एवं तत्सम्बन्धी लोक संस्कृति की झलक लिये हुए एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा। शोभायात्रा 5 जनवरी को शाम 4 बजे से श्री महाकालेश्वर मन्दिर से प्रारम्भ होकर तोपखाना, दौलतगंज चौराहा, नई सड़क, कण्ठाल चौराहा, सतीगेट, छत्रीचौक, गोपाल मन्दिर, पटनी बाजार, बक्षी बाजार चौराहा, कोट मोहल्ला चौराहा होते हुए महाकाल मन्दिर पर सम्पन्न होगी।

शैव कला संगम एवं प्रदर्शनी

      शैव महोत्सव के अन्तर्गत 5, 6 एवं 7 जनवरी को बारह ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति, भगवान शिव के चित्र तथा सभी वेदों के वैज्ञानिक पक्ष पर आधारित प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जायेगा। इसमें चित्रकारों को आमंत्रित कर उनके चित्रांकनों का भी प्रदर्शन होगा। यह प्रदर्शनी स्वामी सन्तदास उदासीन आश्रम नृसिंह घाट रोड पर आयोजित होगी।

अन्य कार्यक्रम

      शैव महोत्सव के अन्तर्गत श्री महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति द्वारा ‘श्री महाकालेश्वर वेद अलंकरण’ उद्भट विद्वान को प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में भारतीय डाक विभाग, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा द्वादश ज्योतिर्लिंग समागम के उपलक्ष्य में डाक टिकिट का विमोचन भी किया जाएगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा

      शैव महोत्सव-2018 के अन्तर्गत प्रथम दिवस 5 जनवरी को आयोजन स्थल सन्तदास उदासीन आश्रम नृसिंह घाट पर प्रात: 8 से 9 बजे तक पंजीयन के उपरान्त प्रात: 9.30 से 11.30 तक उद्घाटन सत्र होगा, 11.45 से 1.30 तक उद्बोधन सत्र होगा तथा दोपहर 1.30 से 3 बजे तक महाप्रसादी के पश्चात सायं 4 बजे से शोभायात्रा श्री महाकालेश्वर मन्दिर से प्रारम्भ होगी।

      शैव महोत्सव के द्वितीय दिवस 6 जनवरी को प्रात: 9.30 से 11 बजे तक उद्बोधन सत्र होगा, 11.15 से 1 बजे तक द्वितीय उद्बोधन सत्र होगा, 1 बजे से 2.30 तक महाप्रसादी के पश्चात दोपहर 3 बजे से 4.30 तक तृतीय उद्बोधन सत्र होगा। चतुर्थ उद्बोधन सत्र का समय सायं 4.45 से 6.30 तक रहेगा। सायं 6.30 बजे से 9 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। सभी उद्बोधन सत्र सभी चार व्यासपीठों पर समानान्तर रूप से आयोजित होंगे।

      शैव महोत्सव के तृतीय एवं अन्तिम दिवस पर प्रात: 9 बजे से 10 बजे तक स्वामी सन्तदास उदासीन आश्रम नृसिंह घाट पर आयोजित कार्यक्रम में अनुभव कथन होंगे। समापन सत्र प्रात: 10.30 से प्रारम्भ होगा, जो कि महाप्रसादी भोजन के साथ सम्पन्न होगा।

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