पंचकल्याणक का तीसरा दिन जन्म कल्याणक के साथ हुआ जन्माभिषेक

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उज्जैन। मुनिश्री समतासागर महाराज, ऐलक श्री निश्चयसागरजी महाराज के सानिध्य में तथा बाल ब्रह्मचारी अभय भैया एवं सुनील भैया के नेतृत्व में पंचकल्याणक के तीसरे दिन भगवान का जन्म उत्सव मनाया गया। जन्मकल्याणक की शोभायात्रा एवं 1008 कलशों से भगवान का जन्माभिषेक हुआ। गुरूवार प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, भगवान आदिकुमार का जन्म, जन्मातिशय गुणारोपण, जन्मोत्सव बधाई, हवन, जन्माभिषेक हेतु शची इंद्राणी द्वारा आदिकुमार को गर्भगृह से लाना, सौधर्म द्वारा प्रभु दर्शन एवं मुनिश्री समतासागरजी महाराज के मंगल प्रवचन हुए। 9.15 बजे से जन्म कल्याणक की शोभायात्रा निकली एवं 1008 कलशों से जन्माभिषेक हुआ। शाम को आरती एवं विद्वानों के प्रवचन हुए। 8.30 बजे आदिकुमार का पालना झुलाई, बालक्रीड़ा पर आधारित बाललीला का मंचन तथा अंत में लक्ष्मीनगर महावीर मंदिर के महिला मंडल द्वारा 72 कलाओं की प्रस्तुति दी गई।
मीडिया प्रभारी सचिन कासलीवाल एवं सुनील जैन खुरई ने बताया कि पंचकल्याणक के तीसरे दिन गुरूवार को भगवान आदिकुमार का प्रातः ठीक 6.30 बजे जन्म हुआ। पुराने आरटीआई परिसर में बसी अयोध्या नगरी में भगवान का जन्म उत्सव मनाया। जन्म उत्सव के तुरंत बाद ही सौधर्म इंद्र अपनी पूरी इंद्रसभा के साथ अयोध्या नगरी पहुंचे। जहां इंद्रो द्वारा प्रतिष्ठा मंडल की तीन परिक्रमा लगाई एवं अयोध्या नगरी के राजमहल में सौधर्म इंद्र अपनी शची इंद्राणी के साथ बालक आदिकुमार के दर्शन करने एवं सुमेरू पर्वत पर जन्माभिषेक करने पहुंचे एवं इंद्र द्वारा सहस्त्र नेत्रों से बालप्रभु का रूप दर्शन कर माता-पिता की प्रशंसा एवं पूजा की। पूरे इंद्र दरबार के साथ ऐरावत हाथी से बाल प्रभु का जन्माभिषेक का जुलूस निकाला गया। जिसमें 2 हाथी, 12 घोड़े, 21 बग्घियां, 4 बैंड, 51 धर्मध्वजा के साथ संपूर्ण समाजजन बालक आदिकुमार का जन्माभिषेक करने लक्ष्मीनगर चैराहे पर निर्मित पांडुकशिला पहुंचे। जहां 1008 कलशों से जन्मे शिुशु तीर्थंकर का जन्माभिषेक किया गया। जन्माभिषेक में विशेष रूप से सौधर्म इंद्र एवं इंद्रो के पश्चात कलश करने का सौभाग्य नरेन्द्रकुमार फूलकुमार टोंग्या, राजकुमार जैन अशोकनगर, डाॅ. राजेश जैन क्षीरसागर को प्राप्त हुआ। वहीं उर्जा मंत्री पारस जैन, अशोक जैन गुनावाले, अशोक जैन चायवाले ने प्रथम अभिषेक के साथ संपूर्ण समाज के 1008 लोगों ने जन्माभिषेक किया। शची इंद्राणी द्वारा बालक का वस्त्र आभुषण से श्रृंगार किया गया एवं भगवान के जन्म कल्याणक की पूजा भी की। तत्पश्चात मुनि के प्रवचन हुए जिसमें उन्होंने कहा कि जन्म तो सबका होता है लेकिन भगवान का जन्म कल्याणक इसलिए मनाया जाता है ताकि जन्म मरण के चक्रों को वह काट देते हैं। भगवान का जन्म अब अंतिम जन्म होता है। इस जन्म के बाद भगवान का मरण नहीं होता बल्कि निर्वाण होता है। बालप्रभु के रूप में जब तीर्थंकर का जन्म होता है तब इनकी महान प्रवृत्ति से जन्म होते हुए धरती पर सुख समृध्दि छा जाती है। सब तरफ लोक मंगल होता है। आनंद उत्सव से जन्म कल्याण मनाया जाता है। भगवान का जन्म जगतकल्याण करने वाला होता है। वे जन्म से ही मति, शुति, अवधि, ज्ञानी, सम्यक दृष्टि और तद्भव मोक्षगामि होते हैं। इसलिए भगवान का जन्म कल्याण एवं उत्सव मनाया जाता है। पंचम काल में पाश्चात्य संस्कृति का धारण कर लोग केक और मोमबत्तियां जन्मदिवस पर बुझाते हैं जो हमारी संस्कृति नहीं है, हमारी संस्कृति में काटना और बुझाना दोनों ही क्रियाएं गलत है। इस देव दुर्लभ पर्याय को व्यर्थ में न गवाएं बल्कि साधना और सिध्दि प्राप्ति एवं धर्म के मार्ग पर चलते हुए मोक्षगामि बने। तब तक हमारे अनंत भव जन्म मरण के चक्र से उदासी में बीते हैं। अब हमकों मोक्ष के मार्ग पर चलना होगा। यही जन्म कल्याण को मनाने का सबसे बड़ा प्रायोजन है। दोपहर में बाहर से आए कलाकार राजेन्द्र उमरगा द्वारा कृष्ण सुदामा नाटक का मंचन किया। शाम को भगवान की महाआरती हुई जिसमें हाथी पर बैठकर आरती की। विद्वानों के प्रवचन हुए, भगवान आदिकुमार को पलना झुलाने के लिए पूरा जैन समाज उमड़ पड़ा। छोटे-छोटे बच्चों के साथ आदिकुमार ने बालक्रिड़ाएं की। अतिथि के रूप में नगर निगम के सभापति सोनू गेहलोत, प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र वशिष्ठ, भाजपा नगर अध्यक्ष इकबालसिंह गांधी, पार्षद करूणा आनंद जैन, राजेश सेठी, राजकमल ललावत, राधेश्याम वर्मा, गब्बर भाटी, विनोद लाला आदि पहुंचे। सभी का सम्मान मंदिरों के अध्यक्ष नरेन्द्र बड़जात्या, अशोक मोदी, इंदरमल जैन, संजय गोधा, डाॅ. भरत जैन, भरत पंड्या, प्रकाश कासलीवाल, प्रदीप झांझरी, पूनमचंद पाटौदी, पवन बोहरा, अशोक जैन सर, आरती जैन ने किया। जलव्यवस्था समिति में अजय सेठी, विवेक जैन, लालचंद सेठी, गिरीश जैन, मंच व्यवस्था समिति प्रदीप पांड्या, राजेश कासलीवाल, अभय पंड्या, पूजन विधि समिति पं. यश जैन, मुकेश जैन, कमल गोधा, विजय बुखारिया, धोती पंछा व्यवस्था समिति विमलेश सेठी, दिनेश बड़ी, मनोज लुहाड़िया, 1008 कलशों का आवंटन समिति नीतू लुहाड़िया, अंजूशा गंगवाल, मधु कोठारी, मुकेष पहाड़िया एवं पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष सुनील जैन खुरई, कार्याध्यक्ष अशोक जैन गुनावाले, राजेन्द्र लुहाड़िया, अरविंद बुखारिया, शैलेन्द्र जैन, संजय लुहाड़िया, मुख्य संयोजक जीवंधर जैन रहे।
आज भगवान आदिकुमार को होगा वैराग्य
आज शुक्रवार को पंचकल्याणक महोत्सव में तपकल्याणक होगा जिसमें भगवान आदिकुमार संपूर्ण संपदा को छोड़कर वन की ओर वैराग्य धारण करने निकल पड़ेंगे। जहां वे तप में लीन हो जाएंगे।

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