उज्जैन में दिव्यांगों को उपकरण वितरण के लिये परीक्षण शिविर आयोजित हुआ

Ujjain organized a training camp for distributing equipment to the people of Divya

प्रत्येक 3 माह में शिविर लगेगा, 80 प्रतिशत दिव्यांगता वालों को मिलेगी मोटराईज्ड ट्रायसिकल
-सांसद डॉ.चिन्तामणि मालवीय

उज्जैन। दिव्यांगों को श्रेष्ठ जीवन स्तर देने के लिये शासन कृत संकल्पित है। कई योजनाएं भारत शासन और राज्य शासन द्वारा दिव्यांगों के लिये संचालित की जा रही हैं। दिव्यांगजन इनका लाभ उठाकर अपने जीवन को कठिनाईयों से मुक्त कर रहे हैं। उन्नति की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। यह बात सांसद डॉ.चिन्तामणि मालवीय ने दिव्यांग परीक्षण शिविर को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक तीन माह में दिव्यांगों के लिये उज्जैन में शिविर आयोजित किये जायेंगे। 80 प्रतिशत दिव्यांगता वाले सभी व्यक्तियों को मोटराईज्ड ट्रायसिकल उपलब्ध कराई जायेगी। सांसद निवास पर आयोजित इस शिविर में उपस्थित दिव्यांगों का परीक्षण किया जाकर उपकरण वितरण के लिये चिन्हांकित किया गया। इस अवसर पर सिंहस्थ केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष  माखनसिंह,  श्याम बंसल, कलेक्टर  संकेत भोंडवे भी उपस्थित थे।
सांसद डॉ.मालवीय ने कहा कि उज्जैन जिले में कलेक्टर श्री भोंडवे द्वारा दिव्यांगों के उत्थान की दिशा में किया जा रहा कार्य राष्ट्रस्तर पर रेखांकित हो रहा है। इससे उज्जैन का नाम भी रोशन हो रहा है। शासन-प्रशासन दिव्यांगों के लिये सतत कार्यरत है। उज्जैन का सांसद भी दिव्यांगों की हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है। उज्जैन में चार बड़े शिविर आयोजित किये जा चुके हैं। शासन संवेदनशील है। उज्जैन जिले में दिव्यांगों को 200 मोटराईज्ड ट्रायसिकल दी जा चुकी है। शीघ्र ही 80 और दिव्यांगों को मोटराईज्ड ट्रायसिकल दी जाने वाली है। इसके साथ ही दिव्यांगों के समग्र स्तरीय जीवन के लिये समुचित प्रयास करते हुए उनको रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास उज्जैन जिले में किये जा रहे हैं।
सिंहस्थ केन्द्रीय समिति अध्यक्ष माखनसिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि संवेदना व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण गुण होता है। संवेदना से ही मनुष्य एक सम्पूर्ण मनुष्य के रूप में परिवर्तित होता है। यदि मनुष्य में संवेदना नहीं है तो वह मनुष्य ही नहीं रहता। संवेदनशील व्यक्ति के मन में प्रत्येक क्रियाकलाप का एक गहरा असर पड़ता है। जो मनुष्य जितना ज्यादा संवेदनशील होगा, वह उतने ही बड़े और महत्वपूर्ण कार्य अपने जीवन में करेगा। शासन-प्रशासन भी दिव्यांगों के प्रति ऐसे ही संवेदनशील भाव को लेकर काम कर रहा है। दिव्यांग अपने जीवन में कोई कमी महसूस नहीं करे। जीवन यापन में कोई परेशानी उनको पेश नहीं आये, इसके लिये शासन एक समग्र विचार लेकर दिव्यांग उत्थान के लिये जुटा है। इसके सुपरिणाम भी सामने दिख रहे हैं। बड़ी संख्या मे दिव्यांगजन शासन की मदद से अपने जीवन की ठोस आधारशिला को स्थापित कर चुके हैं। कठिनाईयों से मुक्त होकर एक अच्छी जिन्दगी जी रहे हैं।
कार्यक्रम में कलेक्टर संकेत भोंडवे ने अपने उद्बोधन में शिविर आयोजन के उद्देश्यों की जानकारी दी। प्रकाश चित्तौड़ा ने अपने सम्बोधन में जिला प्रशासन द्वारा दिव्यांगों के लिये संवेदनशील होते हुए किये जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले में संचालित दिव्यांग उत्थान अभियान द्वारा कई दिव्यांगों को एक अच्छी जिन्दगी मिल सकी है। जिले में ऐसे कई बधिर दिव्यांग थे, जिनको छह-छह लाख रूपये शासन द्वारा वहन कर कॉक्लियर इम्प्लांट करवाया गया। इसके सुपरिणाम में वे आज बेहतर तरीके से जीवन की आवाजों को सुन पा रहे हैं। मौजूद सक्षम संस्था के श्री अरूण शर्मा ने संस्था के कार्यों से सभी को परिचित करवाया। कार्यक्रम में बधिर दिव्यांगता से पूर्व में ग्रसित बेबी आयुषी शक्तावत का सम्मान किया गया, जो कॉक्लियर इम्प्लांट के पश्चात बधिरता के दोष से मुक्त होकर कक्षा 7वी में अध्ययनरत है।
शिविर में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम के जबलपुर क्षेत्रीय केन्द्र से आये अखिलेन्द्र मौर्य तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा दिव्यांगों का परीक्षण कर अंग उपकरण वितरण के लिये मूल्यांकन व चिन्हांकन किया गया।

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