रतलाम जिले के युवाओं ने रचा विश्व इतिहास

Young people of Ratlam district created world history

रतलाम\उज्जैन । म.प्र जनअभियान परिषद् कि नगर विकास प्रस्फुटन समिति के द्वारा एकात्मयात्रा की पूर्व संध्या पर आदि गुरु शंकर के अद्ववेत दर्शन को जन जन तक पहुंचाने के लिये 121000 दीपकों को एक साथ प्रज्वलित कर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के सुनहरे अक्षरों में दर्ज होकर रतलाम के युवाओं ने रचा विश्व रिकॉर्ड। व्रज जैसी जानी मानी अंतरास्ट्रीय संस्था ने भी इसे विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया ।

रतलाम शहर के युवाओं ने की अनूठी पहल

अद्वेत दर्शन अनुसार अनुसार सभी मे एक ही ब्रम्ह ,आत्मा विराजमान है अतः न कोई छोटा न कोई बड़ा जाति पंथ धर्म से ऊपर उठकर सभी मे एक ही ईश्वर के दर्शन कर विश्वबंधुत्व के समभाव को सामाजिक समरसता के माध्यम से पोषित करने की अनुकरणीय पहल है । भावी पीढ़ी को, वर्तमान पीढ़ी को ,हमारे बच्चों को, यह बताने का प्रयास है कि सदियों पहले बिखरे भारत को सांस्कृतिक रूप से एक रखने का प्रयास किया था आदि गुर शंकर ने ,उनका यह अद्वेत विचार की
एक ही चेतना सब मे अनुसूयुत है ,हम में कोई विभेद नही ,आपमें भी वो है,तो में और आप अलग अलग कैसे हो सकते है ,यहाँ तक कि प्राणियों में भी वही चेतना है । तो क्या हम सभी सभी तर्कों विचारो से ऊपर उठकर दीपक को एकात्मता का प्रतीक मानते हुए सामूहिक रूप से विश्व के सामने सीना तानकर यह उद्घोष करे कि हम सब एक है ।

इस पहल के समर्थन में रतलाम जिले  के युवाओ ने किया  121000 दीपकों से  किया दीपयज्ञ का महाआयोजन 15 दिन की सुनियोजित तैयारी ने रतलाम का नाम विश्व पटल पर रखा । यह हमारी पुरातन संस्कृति का भी अंग  है। इसी संस्कृति के तहत दीपयज  का आयोजन  शुभ अवसर पर शुभ कार्य के लिए किया जाता है । कार्यक्रम का आयोजन  म.प्र. जन अभियान परिषद् कि नगर विकास प्रस्फुटन समिति रतलाम के तत्वावधान मे किया गया । नगर विकास प्रस्फुटन समिति द्वारा रतलाम जिले के प्रमुख स्वयंसेवी संगठनों ,धार्मिक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ,रतलाम शहर की युवा शक्ति ,मात्र शक्ति को पंजीयन कर जोड़ा गया था । इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बना कालीका माता का दरबार झाली तालाब पर 121000 दीपक  को एक साथ सभी जाति धर्मो के व्यक्तियों से प्रज्वलित करवाकर दीपयज के माध्यम से भारत की गौरवशाली इतिहास जिसमे समाया  अनेकता में एकता , विविधता से युक्त समृद्धशाली परंपरा का उपस्थित विभिन्न धर्माचार्यो ने पुनः स्मरण दिलवाया ।

एकात्मता से सामाजिक समरसता व सदभाव को पोषित करने हेतु गायत्री परिवार कि वैदिक रीति से दीपयज्ञ  का महा आयोजन  किया गया । शहर के हजारों युवाओं,जनसामन्य के बीच  36 अलग अलग समाजों के समाज प्रमुखों  ने इस दीपयज्ञ में अपनी आहुति दी ।

कार्यक्रम में अनुठी परंपरा का पालन करते हुए  सभी समाज प्रमुखों को सहसम्मान उन्हें झाली तालाब कि हथनियो पर ऊपर बने 16 अलग अलग चबूतरों पर खड़े होकर   दीपयज्ञ व वैदिक मंत्रों ,आदी गुरु शंकर द्वारा रचित नर्मदास्टक के गान तथा साथ ही 108 दीपमाला से मा भारती की आरती  कर जो जहाँ खड़े है वही पर से आरधना कि गई । यह प्रयास कई मायनों में रतलाम के सभी जाति ,धर्म ,वर्ण के भेदभाव को भुलाकर सभी को एक सूत्र में बाँधेगा ।

रतलाम की जनता ने  यथासंभव  तन मन धन से सहयोग कर इस कार्यक्रम को विराट स्वरूप प्रदान किया । रतलाम के युवाओं के  नाम बनने वाले विश्व रिकॉर्ड की साक्षी बनी रतलाम की जनता।

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