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भूतभावन के कोप से डरो, शिप्रा का श्राप मत लो ..! – आचार्य सत्यम्

उज्जैन। मृत्युंजय महाकालेश्वर की प्रिय सरिता मोक्षदायिनी शिप्रा तथा उज्जयिनी के जलतीर्थों के साथ ही भगवती गंगा तक को जहर का परनाला बनाने वाले सत्ताधारी अब अयोध्या-काशी के बाद विपन्न भारत के जन-धन को लुटाकर महाशिवरात्रि पर चुनावी महानौटंकी की तैयारी में हैं। उन्हें गाय-गंगा-गौरी और वसुंधरा के आंसुओं से व्यथित भूतभावन महाकाल, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तथा महाभारत के महानायक योगेश्वर श्रीकृष्ण के कोप का भाजन बनना है। आगामी महाशिवरात्रि पर योगेश्वर की गुरुकुल नगरी में 10 लाख दीपक जलाकर करोड़ों भूखे-नंगे भारतीयों की अमानत में खयानत कर उनके जले पर नमक छिड़कने का काम यदि सत्ताधारी करेंगे तो उन्हें अयोध्या, काशी और उज्जयिनी के अधिपतियों का कोप झेलना ही होगा।

उपरोक्त आशय का वक्तव्य आज यहां मालव रक्षा अनुष्ठान के संयोजक आचार्य सत्यम् (सत्यनारायण पुरोहित अधिवक्ता) ने जारी कर आरोप लगाया कि वचनभंगी शिवराज सरकार 2012 के अपने लिखित वचनों के विपरीत नदी लिंक और प्रदूषण मुक्ति की तुगलकी योजनाओं के नाम पर जन-धन का अरबों रुपया स्वाहा कर चुकी है और खान डायवर्शन के नाम पर पिछले सिंहस्थ में एक अरब रुपयों की बर्बादी के बाद अब मिट्टी के बांध बनाकर खान के जहर को रोकने की कसरत कर भगवती गंगा तक को जहर से भर रही है। शिप्रा त्रिवेणी पर ही सुरक्षित नहीं है, उसके आंचल और अस्तित्व को दिनदहाड़े लूटकर भारी अवैध खनन इन नकली शिप्रा, महाकाल और रामभक्तों के लुटेरे राज में हो रहा है और नाकारा मालवी तथा उज्जैनी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।

वक्तव्य में तुगलक के वारिस कलयुगी राम और महाकाल भक्तों को आगाह किया गया है कि भूतभावन की प्रिय नगरी और मोक्षदायिनी शिप्रा के द्रोहियों को त्रिदेव का श्राप लगना ही है। महाशिवरात्रि की नौटंकी के पूर्व उन्हें राम जन्मभूमि अयोध्या और बाबा विश्वनाथ की नगरी में की गई नौटंकियों के नायकों का हश्र देखना चाहिए, चुनावी महाभारत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रारंभ होने के पहले ही नकली राम और राष्ट्रभक्तों के कुनबे में भगदड़ उनका भविष्य पत्थर पर लिख रही है। यदि टंट्या मामा के स्वघोषित वारिस टायगर मामा को त्रिदेव और मोक्षदायिनी के श्राप से बचना है तो तत्काल प्रायश्चित करें।

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