धर्म/ज्योतिष

2 मार्च से लग गया है होलाष्टक! भूल कर भी न करें ये कार्य…

विपाशेरावतीतीरे शुतुद्रयाश्च त्रिपुष्करे।
विवाहादिशुभे नेष्टं होलिकाप्राग्दिनाष्टकम्।।

अर्थात विपाशा, इरावती और सतलज नदियों के बीच तथा त्रिपुष्कर क्षेत्र में होलिका से पूर्व आठ दिनों तक विवाहादि शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। कुछ विद्वानों ने विपाशा को व्यास, इरीवती को रावी नदी माना है। इस प्रकार सभी नदियाँ पंजाब प्रांत बोधक हो जाती हैं तथा त्रिपुष्कर से पुष्कर क्षेत्र लेने से राजस्थान जो पड़ोसी प्रांत है सम्मिलित हो जाता है। इस प्रकार होलाष्टक का दोष पंजाब- हिमाचल और राजस्थान तक ही होता है अन्य प्रांतों में नहीं। परन्तु इरावती को आज की इरावती नदी यदि मानते हैं तो समस्त उत्तर भारत में होलाष्टक दोष मान्य होगा। इरावती नदी वर्मा मे है जो हिमालय से निकल कर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। हिमाचल से निकलने वाली प्रमुख नदियों के नाम पुराणों मे इस प्रकार बताये गये हैं ~
शतद्रुश्चन्द्रभागा च सरयुर्यमुना तथा।
इरावती वितस्ता च विपाशा देविका कुहू।।
गोमती धूतपापा च वाहुदा च दृशद्वती।
कैशिकी लोहिता चैव हिमवत्पाद्रनिःसृता।।
( कू.पु. १.४५.२७~२८)

इस वर्ष होलाष्टक 2 मार्च, बुधवार से प्रारंभ हो रहा है, जो 9 मार्च होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जाएगा अर्थात्‌ आठ दिनों का यह होलाष्टक दोष रहेगा। जिसमें सभी शुभ कार्य वर्जित है।
भारतीय मुहूर्त विज्ञान व ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक कार्य के लिए शुभ मुहूर्तों का शोधन कर उसे करने की अनुमति देता है। कोई भी कार्य यदि शुभ मुहूर्त में किया जाता है तो वह उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। इस धर्म धुरी से भारतीय भूमि में प्रत्येक कार्य को सुसंस्कृत समय में किया जाता है, अर्थात्‌ ऐसा समय जो उस कार्य की पूर्णता के लिए उपयुक्त हो। इस प्रकार प्रत्येक कार्य की दृष्टि से उसके शुभ समय का निर्धारण किया गया है। जैसे गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, नामकरण, मुण्डन विद्यारम्भ, गृह प्रवेश व निर्माण, गृह शान्ति, हवन यज्ञ कर्म, स्नान, तेल मर्दन आदि कार्यों का सही और उपयुक्त समय निश्चित किया गया है। इस प्रकार होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि से एक होलाष्टक दोष माना जाता है जिसमें विवाह, गर्भाधान, गृह प्रवेश, निर्माण, आदि शुभ कार्य वर्जित हैं।

इस समय विशेष रूप से विवाह, नए निर्माण व नए कार्यों को आरंभ नहीं करना चाहिए। ऐसा ज्योतिष शास्त्र का कथन है। अर्थात्‌ इन दिनों में किए गए कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है तथा विवाह आदि संबंध विच्छेद और कलह का शिकार हो जाते हैं या फिर अकाल मृत्यु का खतरा या बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।

ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र
दीनदयाल उपाध्याय कौशल केन्द्र, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी

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