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संविधान बचाओं रैली से क्या बदलेगी उज्जैन की राजनीति।

डॉ आंबेडकर युवा संघ के अध्यक्ष राजेश सोनगरा,एक गुमनाम शख्स की तरह दलितों की बीच कई सालों से उज्जैन और सटे इलाकों में काम कर रहे है। समाज के बीच काम करने वाले ऐसे चेहरों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में कम ही होती है लेकिन आज उज्जैन में उन्होंने दिखाया कि वे बहुजन की पसंद बनकर उभर रहे है।

उज्जैन से आज संविधान बचाओं रैली महू के लिए रवाना हुई तो उसमें सैकड़ो लोग जुटे। कांग्रेस के नेता असलम लाला ने साफ कहा कि संविधान बचाने की बात पर वे कदम मिलाकर महू जाएंगे।

रैली में सुरेन्द्र मरमट और करण कुमारिया जैसे कांग्रेसी भी शामिल हुए। महिलाओ की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही।

यह भी दिलचस्प है कि संविधान बचाओं रैली को उज्जैन के बहुसंख्यक बेरुवा समाज का समर्थन कही दिखाई नही दिया। लगता है वे महापौर मुकेश टटवाल में साथ संविधान बचाने से ज्यादा संभाबनाएँ देख रहे है।

इन सबके बीच बड़ा सवाल आगामी विधानसभा चुनावों का है

पिछले दिनों में इस क्षेत्र में दलित उत्पीड़न की जिस प्रकार उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हुई है,उससे दलित समाज मे बेहद गुस्सा है।

संविधान बचाओं रैली कोआम पार्टी का समर्थन मिलता दिख रहा है। महू में सभा को आम आदमी पार्टी के नेता गौतम सम्बोधित करने वाले है। मतलब बुध्द महासभा के असर समाज के बाद अब राजनीति में भी निर्णायक हो सकता है। इस महारैली में उज्जैन के आस पास के कई गांवों के लोग शामिल हुए है। यह दलित चेतना का सशक्त प्रदर्शन 2023 में किसके लिए चुनौती बनने जा रहा है,यह कहने की जरूरत नही है।

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