उज्जैन न्यूज़क्राइम न्यूज़
Trending

असल वजह जानें : घट्टिया स्कूल में प्रिंसिपल और प्राध्यापक में चले लात घुसो की असली वजह ये थी।

अमावस्या के दिन मूर्ति स्थापना और अभद्र भाषा से घट्टिया महाविद्यालय में विवाद बढ़ा

उज्जैन।घट्टिया महाविद्यालय में प्राचार्य और प्राध्यापक विवाद और मारपीट के बाद उसके कारणों की पड़ताल करने पर कई चौकाने वे खुलासे सामने आ रहे है। दरअसल इस महाविद्यालय से पिछले दो सालों में तीन प्रभारी प्राचार्यो डॉ.सक्सेना,डॉ. प्रदीप सिंह पंवार और डॉ. प्रदीप व्यास ने स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ली है। महाविद्यालय के स्टाफ से यह जानकारी भी मिली है कि वर्तमान प्रभारी प्राचार्य शेखर मेदमवार लम्बे समय से यहां पदस्थ है और वे अपने सभी प्रभारी प्राचार्यो पर रौब दिखाकर परेशान करते रहे थे। पिछले साल नवंबर में प्रभारी प्राचार्य बने डॉ. शेखर मेदमवार और पांच महीने पहले इस महाविद्यालय में भोपाल से ट्रांसफर होकर आये डॉ.ब्रह्मदीप अलूने के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब प्राचार्य ने अपने चौकीदार के साथ सुबह नौ बजे आकर महाविद्यालय में सरस्वती की मूर्ति की स्थापना कर दी थी। डॉ अलूने का कहना था कि अमावस्या का दिन मूर्ति स्थापना के लिए शुभ नहीं माना जाता,वहीं उस रोज पंडितों ने भी मूर्ति स्थापना में आने से इंकार कर दिया था।

उधर प्रभारी प्राचार्य की अतिथि विद्वानों और कर्मचारियों से तू तू मै मै होती रही है। डॉ.मेदमवार कर्मचारियों को तो दबाते ही है साथ ही उन्हें स्टाफ के अन्य लोगों को एक दूसरे के साथ बैठने तक से रोकते रहे है। महाविद्यालय में कार्यरत पांच अतिथि विद्वानों से भी उनका व्यवहार बेहद खराब रहता है। महाविद्यालय की महिला उत्पीडन समिति की संयोजक डॉ.वन्दना चुटैल इस बाबद उच्च अधिकारियों को मौखिक रूप से शिकायत भी कर चूकी है। उन्होंने प्रभारी प्राचार्य शेखर मेदमवार को लेकर पुलिस थाना घटियाँ में भी शिकायत की है की प्राचार्य का महिलाओं के प्रति व्यवहार बेहद आपत्तिजनक है और उनकी भाषा अमर्यादित है।

14 जनवरी को भी प्राचार्य शेखर मेदमवार की आपत्तिजनक भाषा से विवाद बढ़कर मारपीट तक जा पहुंचा। महाविद्यालय का एक स्टाफ रूम है लेकिन प्रभारी प्राचार्य शेखर मेदमवार स्टाफ को साथ बैठने भी नहीं देते वहीं प्राचार्य महविद्यालय के विकास के नाम पर चंदा देने के लिए दबाव बनाते है और जिन्होंने नहीं दिया उनसे नाराज हो जाते है।

Back to top button