अंतरराष्ट्रीय न्यूज़उज्जैन न्यूज़मध्य प्रदेशमहाकाल न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़

बिन भक्तों के निकली भगवान महाकाल की सवारी

कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन द्वारा किए गए बदलाव मैं निकली सवारी

बिन भक्तों के निकली भगवान महाकाल की सवारी

आज श्रावण के पहले सोमवार को बाबा महाकाल पूरे लाव-लश्कर के साथ नगर भ्रमण पर निकलें, लेकिन भक्त सवारी में शामिल नहीं हो पाए। इसके अलावा संक्रमण की रोकथाम के लिए सवारी मार्ग में भी प्रशासन द्वारा बदलाव कर उसे छोटा कर दिया गया था। पहली बार सवारी महाकाल मंदिर से हरसिद्धि चौराहा, होते हुए रामघाट पहुंची। रामघाट पर पूजन के बाद सवारी रामानुज कोट, से हरसिद्धि चौराहा होकर महाकाल मंदिर लौटेगी। आज सावन मास की शुरुआत हो गई है और पहले ही दिन सावन सोमवार आया है तथा श्रावणभादो मास मैं सोमवार को निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारियों का क्रम आज से शुरू हो गया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने सवारी के स्वरूप और अन्य व्यवस्थाओं मैं बदलाव किया है। क्योंकि सवान में भगवान महाकाल की सवारी के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त उज्जैन पहुंचते हैं। इस कारण सवारी में इस बार श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया गया। इस कारण सवारी में सीमित संख्या में सिर्फ पुलिसकर्मी व व्यवस्था कर्मी शामिल थे। पूरे ठाठ बाट के साथ बाबा महाकाल पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले।जिन लोगों के घर सवारी मार्ग में थे वह लोग जरूर सवारी की एक झलक पाने के लिए टकटकी लगाए हुए छत पर या अपनी गैलरी और घर की खिड़की पर खड़े होकर सवारी का इंतजार कर रहे थे हालांकि इस बार श्रद्धालु ने ऑनलाइन और सोशल मीडिया के जरिए घर बैठे सवारी के दर्शन किए।

आज श्रावण के पहले सोमवार को बाबा महाकाल पूरे लाव-लश्कर के साथ नगर भ्रमण पर निकलें, लेकिन भक्त सवारी में शामिल नहीं हो पाए। इसके अलावा संक्रमण की रोकथाम के लिए
बिन भक्तों के निकली भगवान महाकाल की सवारी

पूजन में सोशल डिस्टेंसिंग, सवारी में भी संख्या सीमित

सवारी निकलने के पूर्व भगवान महाकाल के मुखारबिंद का विधिवत पूजन के पश्चात सवारी निकाली गई। पूजन चांदी द्वार के पास सभा मंडप में किया गया। इसके बाद तय समय पर शाम 4 बजे सभा मंडल से सवारी निकली। मुख्य द्वार पर पुलिस जवान ने पालकी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सवारी में उद्घोषक वाहन, तोपची, भगवान महाकाल का ध्वज, घुड़सवारी, विशेष सशस्त्र बल, पुलिस बैंड, नगर सेना, महाकाल मंदिर के पुजारी-पुरोहित, ढोल वादक समेत अन्य आवश्यक व्यवस्था में लगने वाले कर्मचारी सीमित संख्या में थे।

Tags

Related Articles

Back to top button