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महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के खिलाफ छात्रा मैदान में

छात्रा ने यूनिवर्सिटी पर गलत मूल्यांकन का लगाया आरोप...यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के सामने उन्हें रजत पदक लेने के लिए दवाब बनाया जा रहा है, जबकि उनका कहना है कि मैं स्वर्ण पदक की हकदार हूँ।

उज्जैन। किसी भी विश्वविद्यालय के लिए उसका दीक्षांत समारोह बहुत गरिमामय होता है। विद्यार्थियों के बीच इस समारोह का इंतजार बेसब्री से रहता है, लेकिन उज्जैन के पाणिनि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के खिलाफ वहीं की छात्रा ने बिगूल फूंक दिया है। छात्रा ने यूनिवर्सिटी पर गलत मूल्यांकन का आरोप लगाया है। छात्रा का कहना है कि यूनिवर्सिटी में प्रति वर्ष विद्यार्थियों का सही मूल्यांकन नहीं किया जाता है। यहां राजनीति हावी है यहां जातिवाद हावी है। विद्यार्थियों को उनकी मेहनत के आधार पर मूल्यांकन करने की जगह यह लोग रिशेतदारों को प्रमोट करते हैं।
महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के खिलाफ छात्रा मैदान में
एम ए योगा की छात्रा और बचपन से अब तक हमेशा मैरिट में रहने वाली ललिता ठाकुर अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ खुलकर मैदान में है। उनका कहना है आज यदि मैंने आवाज नहीं उठाई तो आने वाले स्टूडेंट्स के साथ भी यही सब होगा। चूँकि ललिता ठाकुर योग के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम है, उन्हें देश विदेश में अनेक जगह योग के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है लेकिन अपनी ही यूनिवर्सिटी के दोगले व्यवहार से क्षुब्ध होकर उन्होंने यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के सामने उन्हें रजत पदक लेने के लिए दवाब बनाया जा रहा है, जबकि उनका कहना है कि मैं स्वर्ण पदक की हकदार हूँ।
महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के खिलाफ छात्रा मैदान में
उनका कहना है जिसे भी स्वर्ण पदक दिया जा रहा है उसको ठीक से योगासन करते भी नहीं आते हैं। शुद्धिक्रिया के नाम से ही वो क्लास में आना बंद कर देती थी। उनके परिवार के रिश्तेदार यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं तथा कुछ उनके परिवार के लोग राजनीति में जिसका फायदा उठाकर और फोन लगवाकर वो स्वर्ण पदक पर कब्जा कर पाई है जो कि सरासर गलत है। यूनिवर्सिटी के अंदर मैंने सबसे बात की, कुलपति तक मेरी बात पहुँचाई लेकिन सब मुझे आश्वासन का झुनझुना पकड़ा कर खमोश रखने की कोशिश में है। एन केन प्रकरेण इस मामले में ललिता की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। कोशिश की जा रही है कि 31 दिसम्बर को होने वाले कार्यक्रम तक वो चुप्पी साधे रखें इस हेतु उस पर दवाब बनाया जा रहा है।
महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के खिलाफ छात्रा मैदान में
लेकिन योग की यह छात्रा निडर होकर अपने हक में आवाज बुलंद किये हुए हैं। यूनिवर्सिटी के बड़े-बड़े प्रोफेसर मिलकर इस छात्रा की आवाज को दबा नहीं पा रहे हैं। ललिता ठाकुर का कहना है कि यूनिवर्सिटी के पूरा ढर्रा ही बिगड़ा हुआ है, मैं इसके खिलाफ राज्यपाल तक आवाज उठाऊँगी। प्रेक्टिकल के समय स्वर्ण पदक जिसे दिया जाना तय हुआ है वो प्रेक्टिकल एक्जाम के समय कोई आसन नहीं कर पाती थी और मौन हो जाती थी। न ही कॉलेज की किसी योग एक्टिविटी में उन्होंने कभी भाग लिया।
महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के खिलाफ छात्रा मैदान में
केवल रिशेतदारो एवं राजनीति के दम पर फोन लगवाकर प्रथम स्थान हासिल कर लिया है जो शिक्षा के साथ अन्याय है। ललिता ठाकुर की उपस्थिति भी सर्वाधिक रही है एवं वो आज भी किसी भी प्रायोगिक परीक्षा से गुजरने को तैयार है। उन्होंने यूनिवर्सिटी में प्रत्येक स्तर पर आवेदन करके अपनी मांग दर्ज कर दी है। ललिता ठाकुर का कहना है कि योग साधना मेरे जीवन का आधार है। इसलिए मैं अपने साथ अन्याय सहन नहीं कर सकती। यूनिवर्सिटी प्रबंधन किसी भी तरह दीक्षांत समारोह के निर्विघ्न पूर्ण हो जाने के लिए ललिता की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है। देखना यह है कि समय के साथ यूनिवर्सिटी प्रबंधन के बड़े-बड़े प्रोफेसर जीत पाते हैं या एक छात्रा जिसने कि यूनिवर्सिटी के अव्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है उसकी विजय होती है।
महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के खिलाफ छात्रा मैदान में
‘ललिता ठाकुर कॉलेज के मूल्यांकन पर सवाल उठाकर बेवकूफी कर रही है वो यूनिवर्सिटी के बड़े लोगों से संघर्ष करके स्वयं अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रही है। मेरे हाथ में कुछ नहीं है। इसके लिए आप उच्च स्तर पर बात कीजिये। मैं अपना बयान दर्ज नहीं कर सकता।
-डॉ. भानु प्रताप बुंदेला
‘सभी अंक परीक्षक तय करते हैं, उन्होंने किस आधार पर मूल्यांकन किया, इस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। मैरिट के आधार पर ही पदक तय किये गए हैं। हाँ छात्रा ने आपत्ति दर्ज की है जो कुलपति जी के सज्ञान में है।
-डॉ. तुलसीदास पुरोहा
‘इस विषय मे मैं कुछ नहीं कह सकती। पुरोहा जी से बात की जाए और फोन काट दिया गया।
-पूजा उपाध्याय
‘सभी प्रोफेसर इस मुद्दे से भाग रहे हैं। कोई उचित जवाब नहीं दे रहे हैं। हाल ही में मुझे जो पत्र भेजा गया वो भी जानबूझकर गलत एड्रेस पर भेजा गया है। केवल वाट्सएप पर कॉपी से मुझे जानकारी लगी है। पहले सेमिस्टर में नम्बर जानबूझकर कम दिए गए थे जिसकी मैंने लिखित आपत्ति दर्ज कर आवेदन डॉ. मनमोहन उपाध्याय जी को दिया गया था। बुंदेला सर ने मेरी फाइल तक घुमा दी थी, जिसकी वापस कॉपी कराकर मैंने उन्हें दी थी।
100 प्रतिशत उपस्थित के बाद भी जिन स्टूडेंट की अनुपस्थिति कम होने पर उनकी पेनल्टी लगी, उन्हें कैसे मुझसे अधिक अंक प्रदान किये गए यह सरासर गलत है।
मैंने जो योग आसनों के फोटो भेजे हैं, यदि स्वर्ण पदक प्राप्त छात्रा वो सभी आसन करते हुए फोटो भेज देती है तो ही मैं रजत पदक मान्य कर लूँगी, यह मेरा खुला चैलेंज है।
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