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महेश परमार का कांग्रेस तोड़ो अभियान…माया त्रिवेदी के साथ पहुंचे जीतू पटवारी के दर पर… 

दोनों हाथों में लड्डू रखने के शौकीन महेश परमार उज्जैन की बची खुची कांग्रेस की मट्टी पलीत करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। उधर राहुल गांधी भारत जोड़ो अभियान पर निकले है और इधर महेश परमार उज्जैन कांग्रेस तोड़ो अभियान पर माया त्रिवेदी के साथ भोपाल पहुंच गए। उज्जैन नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष का नेता कौन बने,यह जिम्मेदारी महेश परमार को सौंपी गई है। कुछ महीनों पहले महापौर के चुनाव में कांग्रेस की एकता की बड़ी बड़ी बातें करने वाले महेश परमार नेता प्रतिपक्ष पद पर माया त्रिवेदी के पक्ष में लामबंदी करने वरिष्ठ नेताओं से मिल रहे है। महेश परमार ने कमलनाथ से मिलते हुए एक फोटो साझा किया जिसमें वह कमलनाथ का आशीर्वाद लेने की बात कह रहे है। कमलनाथ पिछले चार सालों से कांग्रेस को मजबूत करने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे है,पर वे यह नहीं जानते की उनके नेता सुधरने वाले नहीं है।

शायद कमलनाथ यह भी नहीं जानते कि महेश परमार भी कांग्रेस की उसी बिरादरी के सिपहसलार है जो पार्टी को बनाती कम,निपटाती ज्यादा है। महेश परमार ने कमलनाथ से मुलाकात के बाद अजय सिंह और जीतू पटवारी से भी माया त्रिवेदी के साथ मुलाकात की। दोनों हाथों में लड्डू रखने के शौकीन महेश परमार इस मुलाकात के फोटो सोशल मीडिया पर साझा करना भूल गए जो हम my sity news के पाठकों के लिए खासतौर पर साझा रहे है।

महेश परमार का कांग्रेस तोड़ो अभियान...माया त्रिवेदी के साथ पहुंचे जीतू पटवारी के दर पर... 

कुछ दिनों पहले तक लोग महेश परमार के साथ नई कांग्रेस के उदय की बात कह रह रहे थे। महेश परमार को राजनीति में लम्बी पारी खेलने के लिए कांग्रेस को मजबूत रखना होगा। वे यदि यह चाहते है कि माया त्रिवेदी नेता प्रतिपक्ष बने इसमें कोई बुराई नहीं है,माया त्रिवेदी अच्छी और काबिल नेता भी है। लेकिन इसके लिए महेश परमार को उज्जैन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बटुक शंकर जोशी,राजेन्द्र वशिष्ठ,नूरी खान और रवि रॉय को विश्वास में लेने का प्रयास करना चाहिए। यदि वे ऐसा करने की कोशिश भी करते तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में बेहतर सन्देश जाता।

जबकि महेश परमार खुद लामबंदी करने में जुट गए और माया त्रिवेदी के साथ भोपाल पहुँच गए। वे जिस प्रकार की राजनीति को बढ़ावा दे रहे है उससे कांग्रेस कमजोर ही होगी। खैर कांग्रेसियों को खुद के सिर पर गरम पानी डालने और फिर चिल्लाने की आदत हो गई है। वह तो भला हो जनता का जो विपक्ष को जिंदा रखने के लिए कांग्रेस को वोट दे रही है। अफ़सोस महेश परमार कांग्रेस के वोट पर चोट की राजनीति के अगुआ बन गए है और यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में इस पर झाडू फिरना तय है।

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