उज्जैन न्यूज़

…अब शशक्त खबरें आने दो….डॉ पवनेन्द्र नाथ तिवारी

पत्रकार तो किसी का गुलाम हो ही नहीं सकता और गुलामी करने वाले पत्रकार नहीं!
हाँ चारण भाट हो सकते है जिनकी अब शहर में कमी भी नहीं जिधर देखों उधर ही नजर आ जाते है एक ढूँढ़ो हजार हुजीरये चारण भाट बिरदावली कॉपी कट पेस्ट करते नजर आ जायेंगे और पत्रकारो को तो अब आप ढूंढते रह जाओगे क्योंकि सिंह/शेर किस्मत वालो को ही नजर आते है!…और अब सिंहों/शेरों की दहाड़ के गुंजायमान होने का समय पत्रकारों की लौह लेखनी की आवश्यकता है उठो पत्रकारो अब आंखे खोलों चारण भाटो की बिरदा वली नहीं अब शशक्त खबरें आने दो-अब शशक्त खबरें आने दो-२…!

Related Articles

Back to top button