धार्मिक न्यूज़मध्य प्रदेश

शिव शंभू सन्यासी मंडल के संत पहुंचे त्रिवेणी, शिप्रा की दुर्दशा पर जताया आक्रोश

निरीक्षण के बाद डॉ. अवधेश पुरी महाराज ने लिखा सीएम एवं पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को पत्र स्थाई समाधान एवं दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग की

उज्जैन। त्रिवेणी पर मिट्टी का बांध ढह जाने और गंदा बदबूदार पानी शिप्रा में मिल जाने को लेकर मंगलवार को शिव शंभू सन्यासी मंडल उज्जैन द्वारा माँ क्षिप्रा का निरीक्षण किया इसकी दुर्दशा देखकर संतो की आत्मा आहत हुई है। संतों ने अपना आक्रोश व्यक्त किया तथा कहा कि यह सीधे तौर पर रामघाट पर आचमन लेने वाले व स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की आस्था एवं श्रद्धा के साथ खिलवाड़ है। संतों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि दोषी अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही कर माँ क्षिप्रा की पवित्रता के लिए स्थाई समाधान अवश्य निकालें।
इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की गलती से हुई पूण्यसलिला माँ क्षिप्रा की दुर्दशा के स्थाई समाधान व दोषियों पर कड़ी कार्यवाही के सन्दर्भ में क्रांतिकारी संत परमहंस डॉ. अवधेशपुरी महाराज ने मंगलवार को मुख्यमंत्री तथा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नाम पत्र लिखा। संत अवधेशपुरी महाराज ने पत्र में लिखा कि करोड़ों भक्तों की आस्था की केंद्र पुण्य सलिला माँ क्षिप्रा की वर्तमान में जो दुर्दशा हो रही है उसके पीछे प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही एवं उनकी संकुचित सोच ही प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। सोमवार शाम को जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री कमल कुबाल द्वारा स्वयं त्रिवेणी बांध को काटकर खान नदी का सारा करोड़ों लीटर केमिकल युक्त गन्दा पानी क्षिप्रा में मिला दिया गया, जिसके कारण पूर्व से गऊघाट पर जमा करीब 156 एमसीएफटी नर्मदा जी का शुद्ध जल बेकार हो गया। उस जल को लाने की लागत करीब डेढ़ करोड़ रुपए बताई जा रही है तथा पूरी क्षिप्रा मैली हो गई।
घोर आश्चर्य है कि शनि मंदिर पर स्थित त्रिवेणी पर कई बार कच्चा बांध बनाकर विगत 7 वर्षों में करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किया गया किंतु दुर्भाग्य है कि एक पक्का बांध बनाकर स्थाई रूप से खान नदी के गंदे ड्रेनेज वाटर को नहीं रोका गया। अवधेशपुरी महाराज ने कहा वास्तव में प्रशासन चाहता तो सिंहस्थ 2016 से पूर्व ही मैंने एक सुझाव दिया था कि त्रिवेणी से कालियादेह महल तक एक कैनाल के द्वारा खान नदी के गंदे पानी को बाईपास कर दिया जाए। उस कैनाल की कीमत मात्र 17 करोड़ आ रही थी, किंतु जल संसाधन के लालची अधिकारियों द्वारा उसे ना बनाते हुए करीब 100 करोड रुपए की खान डायवर्शन योजना को स्वीकृत किया गया, जो कि शत-प्रतिशत विफल रही है। अब वहीं प्रशासन उसे विफल स्वीकार कर चुका है।
अवधेशपुरी महाराज ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सच्चे अर्थों में हम उज्जैन को स्मार्ट बनाना चाहते हैं तो उससे पूर्व हमें शिप्रा को स्मार्ट बनाना चाहिए और क्षिप्रा को स्मार्ट बनाने के लिए इंदौर का ड्रेनेज वाटर एवं देवास की केमिकल फैक्ट्रियों का केमिकल व उज्जैन के गन्दे नालों का गंदा पानी क्षिप्रा में ना आए इसलिए दूरगामी योजना बनाते हुए कैनाल के द्वारा इस गंदे पानी को आगे बढ़ाना चाहिए। इससे किसानों को सिंचाई के लिए जल मिल सके तथा क्षिप्रा का भी उद्धार हो सके। शिप्रा निरीक्षण के दौरान महानिर्वाणी अखाडे से डॉ. अवधेशपुरी महाराज, मुकुंद पूरी महाराज, आव्हान आखडे से महन्त सेवानन्द गिरी महाराज, अग्नि आखडे से महंत रामेश्वरानन्द महाराज, आनन्द आखडे से महन्त समुंदर गिरी महाराज, हरि ओम नाथ महाराज, दत्त अखाडे से महन्त राजा पूरी महाराज, कृष्णा गिरी महाराज, स्वामी प्रणवानन्द महाराज, सिद्धा आश्रम से देवपूरी महाराज, जुना अखाडे़ से थानापति महंत देवगिरी महाराज सहित विजय गिरी गोस्वामी, शिवम् गुरू, मनोज पूरी, मनोहर गिरी, मोनू पाठक, सन्दीप बागड़ी सहित अन्य दस अखाड़ो के संत महंत मौजूद थे।

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