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गबन और आर्थिक अनियमितताओं का केंद्र बना विश्वविद्यालय का क्रीड़ा विभाग

उज्जैन । महिला अपराधों और आर्थिक अपराधों को लेकर बहुचर्चित विक्रम विश्वविद्यालय क्रीड़ा विभाग में अब लाखों रुपय का गबन और आर्थिक भृष्टाचार का मामला सामने आने से शिक्षा जगत फिर एक बार बदनाम हो रहा है। 

गबन और आर्थिक अनियमितताओं का केंद्र बना विश्वविद्यालय का क्रीड़ा विभाग

विश्वविद्यालय के इस घोटाले और गबन में क्रीड़ा विभाग के निदेशक निश्छल यादव और लिपक दीपक दुबे का नाम सामने आया है। क्रीड़ा विभाग के इस घोटाले को महाविद्यालयों और क्रीड़ा संगठनों के कोच एवं दल व्यस्थापकों ने उजागर किया है। जानकारी के अनुसार निदेशक निश्छल यादव की अनुशंसा पर विश्वविद्यालय से लगभग 27 से 30 विभिन्न खेलों दलों को अन्तर्विश्वविद्यालयीन एवं पशिचम क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिए निदेशक श्री यादव की अनुशंसा पर विभागीय लिपक दीपक दुबे को सभी टीमों के अनुमानित राशि विश्वविद्यालय ने टीमों के रवाना होने पहले ही दे दी थी लेकिन क्रीड़ा विभाग को अग्रिम पूर्ण राशि प्राप्त होने के बाद भी दल व्यस्थापकों को पूरी राशि नहीं मिलने की असत्य जानकारी दे कर मात्र 20 से 30 प्रतिशत राशि का ही भुगतान किया गया। क्रीड़ा दलों की वापसी पर जब व्यस्थापकों को उनकी मांग पर निदेशक और लिपक ने जब भुगतान नही किया तो खोजबीन करने पर जो जानकारी सामने आई उसने ही लाखों के इस आर्थिक गबन को उजागर किया जिसके अनुसार निदेशक और लिपक पहले ही हर क्रीड़ा दल की अनुमानित राशि विश्वविद्यालय से निकाल चुके थे और अब व्यस्थापकों पर प्राप्ति दिए बिना और शेष भुगतान किए बिना फाइलें जमा करने का दबाव दल व्यस्थापकों पर बना रहे हैं। हालांकि अब आर्थिक घोटाले और गबन के इस पूरे अपराध की कुलपति सहित कई स्थानों पर शिकायत की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि क्रीड़ा विभाग में विगत वर्षों में लाखों रुपए के इस आर्थिक घोटालों के खुलने से पहले ही निदेशक श्री यादव ने स्वयं को साफ-पाक बताने के लिए प्रभारी निदेशक पद से स्तीफा दे दिया था जिसे मंजूर नहीं किया गया है। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार विगत वर्षों की गंभीर जांच करवाई गई तो लाखों का आर्थिक घोटाला और गबन सामने आएगा।

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