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विक्रम विश्वविद्यालय का नया धमाका… वीडियो देखें

10 वी में 48 प्रतिशत,बैचलर में 49 प्रतिशत लेकिन कार्यपरिषद सदस्य बनते ही 100 प्रतिशत। 

 

विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन शिक्षा संस्थान के साथ ही जादू और रहस्य का केंद्र भी बन गया है। कई बरसों पहले बनी पाताल भैरवी में हीरों थे जितेंद्र। लेकिन अब यदि उज्जैन में नई पाताल भैरवी बने तो उसके हीरो के लिए दो किरदार फीट बैठेंगे। एक तो विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अखिलेश पांडे और दूसरे कुलसचिव डॉ प्रशांत पौराणिक।

अब विश्वविद्यालय की जादूगरी की बात करते है। किसी भी विश्वविद्यालय में कार्यपरिषद सदस्य कुछ विद्वानों को बनाया जाता है जो विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर नजर रख सके और उसकी गरिमा बढ़ा सकें।

लेकिन इस बार जो विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद सदस्य बनाये है,उसमे कुछ जादूगर भी शामिल कर लिए गए है।

एक सदस्य की बदतमीजी के कारण तो विश्वविद्यालय में प्रदर्शन हो ही रहे है,उस पर एक सदस्य की करामात और सामने आ गई।

इन कार्यपरिषद सदस्य का नाम बताया जा रहा है संजय नाहर। आज उनकी उपलब्धियों का विश्वविद्यालय में छात्र नेता बबलू खींची ने प्रदर्शन के माध्यम से बखान किया।

पता चला है कि नाहर साहब बोर्ड परीक्षा में 48 प्रतिशत पा सके थे। फिर बैचलर में 49 प्रतिशत तक पहुंच गए। कई सालों तक पढ़ाई को विराम दिया और फिर ज्योतिर्विज्ञान से एमए में एडमिशन लिया। यहां उन्होंने प्राप्त किये 100 में 100 अंक।

पता चला है कि कार्यपरिषद सदस्य बनते ही अचानक बुद्धि का खजाना उन्हें मिल गया है। छात्र नेताओं का कहना है कि जब से कुलपति प्रो पांडे और कुलसचिव डॉ प्रशांत पौराणिक ने विश्वविद्यालय की कमान संभाली है तब से उनकी जादूगरी के चलते अंक पाने के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो रहे है। 

पीएचडी फर्जीवाड़े में अंकों का बदलने का खेल इस कदर किया गया कि जो अंदर होना था वह बाहर हो गए औऱ जो कही नही थे,वह पीएचडी में प्रवेश पाकर भाग्य चमका रहे है। छात्र नेताओं ने तमाम एविडेंस पेश किए लेकिन बेशर्मी इस कदर की ठीक से जांच की गारंटी भी न मिली।

अब विश्वविद्यालय में छात्र यह नारा लगा रहे है कि कुलपति और कुलसचिव के खास बनिये या कार्यपरिषद के सदस्य बनिए और मनमाफिक फायदे चुनिए।

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