खुलासा
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स्मार्ट सिटी के 45 करोड़ पर गिद्द शिकार…

स्मार्ट सिटी के 45 करोड़ पर गिद्द शिकार

अधिकारियों ने स्मार्टसिटी की जमा रकम पर भी हांथ काले किये

मामला लोकायुक्त भोपाल तक पहुंचा

स्मार्ट सिटी के अकाउंट अफसर तोमर को बुलाया जाएगा भोपाल

अधिकारियों ने अधिक ब्याज देने वाली बैंक से 45 करोड़ निकलकर कम ब्याज देने वाली बैंक में रकम क्यों जमा की…?

उज्जैन। उज्जैन के स्मार्ट सिटी के अधिकारी काले कारनामे करने में इतने स्मार्ट हो गए हैं कि वे अब सरकारी जमा रकम को भी नहीं छोड़ रहे हैं। पता चला है कि स्मार्ट सिटी के आला अफसरों ने अकाउंट अफसर के साथ मिलकर स्मार्ट सिटी की 45 करोड़ की राशि में गिद्द की निगाह बनाकर उसके ब्याज पर भी डकैती डाल ही ली। मामला तब खुला जब निचले अधिकारियों को उस बंदरबांट में से हिस्सा नहीं मिला तो खबर बाहर निकल कर आई और स्मार्ट सिटी द्वारा कराए गए महाकाल लोक में भ्रष्टाचार की जांच कर रहे लोकायुक्त भोपाल तक एक शिकायत पहुंचाई गई है। अब इस मामले में शीघ्र ही स्मार्ट सिटी सीईओ को भोपाल तलब किया जाएगा साथ ही उस अकाउंट अफसर को भी बुलाया जाएगा जिस की मिलीभगत से यह कारनामा किया गया है।

लोकायुक्त भोपाल में उज्जैन के कलेक्टर सहित स्मार्ट सिटी के अधिकारियों पर महाकाल लोक में किए गए भ्रष्टाचार की जांच खोल दी है। इस जांच में कई अधिकारियों के सांसे थमी हुई है क्योंकि कागज पर ही महाकाल लोक का भ्रष्टाचार जाहिर हो रहा है। लेकिन उसके बावजूद कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने इस लोकायुक्त जांच में फंसने के बाद भी अपने काले कारनामों पर या यूं कहें कि काली कमाई करने की हवस कम नहीं की है। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने अपने अकाउंट अफसर और कुछ अपने खास लोगों के साथ मिलकर ऐसा घपला किया कि समझने वाले भी गच्चा खा गए कि ऐसी कमाई भी क्या की जा सकती है?

ऐसे किया घपला?

स्मार्ट सिटी का ₹450000000 का अकाउंट एफडी एक्सिस बैंक में जमा थी जिसका ब्याज समय अनुकूल आता रहा और उस ब्याज से ही स्मार्ट सिटी के कई काम बजट ना होने के बावजूद होते रहे। एक्सिस बैंक 6.5 प्रतिशत ब्याज 45 करोड़ की एफडी पर दे रही थी। स्मार्ट सिटी के स्मार्ट भ्रष्टाचारियों ने अपने स्मार्ट अकल लगाकर नया कारनामा कर दिखाया। 45 करोड़ की राशि एक्सिस बैंक से निकालकर उसे आईसीआईसीआई बैंक में जमा करा दिया गया। आईसीआईसीआई बैंक 45 करोड की राशि पर महज 3.5 प्रतिशत ब्याज ही एफडी पर दे पा रही है। यानी कि सरकार को इस रकम का ब्याज 6.5% मिलना चाहिए था वह आधा होकर 3.5% ही मिल सकेगा।

खेल के पीछे का रहस्य

एक्सिस बैंक से राशि 45 करोड़ निकालने पर और उसे आईसीआईसीआई बैंक में जमा करने पर एक करोड़ रूपया मैनेजर ने अलग से अधिकारियों को दिलवा दिया। पता चला है कि इंदौर के ठेकेदार को लाभ दिलवाए जाकर अधिकारियों ने उस 10000000 रुपए में से आपस में बंदरबांट कर ली। इस मामले में अभी तक मध्य प्रदेश शासन के वित्तीय विभाग को खबर तक नहीं हुई और ना ही मुख्यमंत्री तक यह मामला पहुंचा। लेकिन निचले अधिकारियों ने लोकायुक्त भोपाल के अधिकारियों को इस मामले में जानकारी जरूर दे दी। अब लोकायुक्त भोपाल स्मार्ट सिटी अधिकारियों को फिर से तलब करने वाली है। वित्तीय अधिकारी इस मामले को लेकर अब मुंह छुपा रहे हैं।

सुविधाघर से सीधे मीटिंग हॉल में चले गए वित्तीय अधिकारी

इस प्रतिनिधि ने स्मार्ट सिटी के वित्तीय अधिकारी जुबान सिंह तोमर से संपर्क करना चाहा तो मालूम पड़ा कि साहब अभी-अभी फ्रेश होने सुविधा घर गए हैं। जब 2 घंटे तक इंतजार के बाद भी जुबान सिंह तोमर नहीं लौटे तो इन्हीं के केबिन के बाहर पदस्थ चपरासी ने यह जानकारी दी कि साहब तो मीटिंग में चले गए होंगे। हमने यह पूछा कि क्या सुविधा घर से सीधे मीटिंग हाल में जाने का रास्ता है लेकिन वह चपरासी हंसकर रह गया। आपको बता दें कि यह वही जुबान सिंह तोमर है जो लोकायुक्त की जांच के घेरे में हैं और इन्हें भी उन लगभग दर्जनभर अधिकारियों के साथ जांच में लिया गया है जिन्होंने महाकाल लोक में भ्रष्टाचार का आरोपी बनाया गया है।

अब देखना यह है कि मामले में मध्यप्रदेश शासन का ग्रृह और वित्तीय विभाग क्या कार्रवाई करता है। पता चला है कि इस मामले में भी ऊपर से लेकर नीचे तक सभी ने अपनी जेबे गरम की और शासन को स्थाई रूप से अपनी ही राशि के लाभ से वंचित करते हुए हानि पहुंचाई। हालांकि यह मामला भी कांच की तरह साफ है जिस पर आने वाले समय में प्रकरण दर्ज होगा ही और कई अफसर इसमें जेल जाएंगे।

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